यूट्यूब से सीखा नकली नोट छापना, ढाबे पर खपाते ही धराये

यूट्यूब से सीखा नकली नोट छापना, ढाबे पर खपाते ही धराये

शिवपुरी, मोनू प्रधान| ज़िले की कोलारस थाना पुलिस (Kolaras Police) ने नकली नोट (Fake Currency) छापकर बाजार में खपाने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है | यह लोग अशोकनगर (Ashoknagar) जिले के निवासी बताये जा रहे है और इन्होंने नक़ली नोट छापना गूगल और यूट्यूब से सीखा था।

जानकारी के मुताबिक, बाज़ार से यह लोग 20 या 30 रुपये का सामान लेकर 200 रुपये का नकली नोट देते थे और दुकानदार से शेष बचे असली नोट ले लेते थे। बताया जा रहा कि यह लोग अशोकनगर से कोलारस आये थे और एक होटल पर नकली 200 रुपये के नोट से कुछ सामान खरीद रहे थे तब ही होटल संचालक को नोट के नकली होने की आशंका हुई तो उसने पुलिस को बुलाकर इनको पकड़वा दिया।

पुलिस ने नकली नोट छापकर खपाने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं आरोपियों के कब्जे से प्रिंटर सहित 200 रुपये के 19 नोट बरामद किये हैं|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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