नगर निगम कर्मचारी ही कर रहे सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन, बिना मास्क घूम रहे दफ्तर में

नगर निगम कर्मचारी ही कर रहे सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन, बिना मास्क घूम रहे दफ्तर में

सिंगरौली//राघवेन्द्र सिंह गहरवार

एक तरफ जहां महामारी के संक्रमित मरीजो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, संक्रमण के मामले में भारत विश्व के चौथे संक्रमित देश के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। वहीं देश में बहुत से ऐसे राज्य व कई ऐसे जिले हैं जिनमें कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में काफी हद तक लोगों को निजात मिल चुकी है। या यूं कहें कि संक्रमण के मामले भारत के काफी हिस्सों से खत्म हो चुके हैं। लेकिन संक्रमण के मामलों में आई कमी के बाद से जिस तरह से देश में लॉकडाउन खोल दिया गया है उसके बाद लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को नजर अंदाज करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें कई लोग ऐसे भी हैं जिनपर लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी है। जनता को जागरूक करने वाले ही जब नियमों को तार तार करें तो भला आम जनता से उम्मीद करना बेईमानी होगी

नगर निगम के अधिकारी कर्मचारी कर रहे हैं खुलेआम नियमों का उल्लंघन

सिंगरौली नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा नगर निगम कार्यालय परिसर में लगातार नियमों की धज्जियाँ उड़ाते साफ देखें जा सकते हैं । जिन्हें बगैर मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग को दरकिनार करते देखा जा रहा है। एक तरफ निगम कर्मियों को निगम क्षेत्र में बगैर मास्क के घूम रहे लोगों की चालानी कार्यवाही के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने आदेशित किया है, वहीं खुद निगम के लोग ही नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। सिंगरौली जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों की अगर बात की जाए तो जिले में कोरोना-वायरस से संक्रमित केवल एक मरीज और है बाकी संक्रमण के जो भी मामले सामने आए थे सभी मरीज स्वस्थ होकर अपने घर चले हैं ।

लेकिन जिस तरह की तस्वीरें नगर निगम से निकल कर सामने आई हैं उससे यह तो पूरी तरह से स्पष्ट है कि कहीं ना कहीं नगर निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग पर गंभीर होने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो कि इनकी ये लापरवाही लोगों के लिए भारी साबित हो जाए।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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