सिंगरौली में तूफ़ान का कहर, बारिश के साथ गिरे ओले, कई पेड़ धराशायी, छतों के छप्पर उड़े

सिंगरौली में तूफ़ान का कहर, बारिश के साथ गिरे ओले, कई पेड़ धराशायी, छतों के छप्पर उड़े

सिंगरौली//राघवेन्द्र सिंह गहरवार| भीषण गर्मी के बीच सिंगरौली जिले (Singrauli District) में आफत का बादल टूट पड़ा है| रोजाना जिले के किसी न किसी क्षेत्र में आचनक आंधी तूफान और बारिश (Rain) के साथ ओले पड़ने की घटना लगातार एक हप्ते से जारी है| वही आज रविवार को दोपहर में अचानक मौसम (Weather) ने करवट बदली और कुछ घंटों में चक्रवाती आंधी तूफान व गरज चमक के साथ झमाझम बारिश और बड़े बड़े ओले पड़े| आंधी तुफान बारिश और ओले के साथ शुरुआत में पश्चिम से पूर्व दिशा की तरफ से आया इसके बाद कुछ घंटों में हवा का रुख बदलते ही इनकी दिशा पूर्व से पश्चिम की तरफ हो गई, आंधी तूफान इतना जोरदार था कि कई पेड़ धराशायी हो गए| वही कई घरों के छत की शीट उड़ गई वही मिट्टी के बने खप्पर आंधी में बिखर गए|

इस तूफ़ान से विद्युत सप्लाई भी बाधित हुई क्योकि तेज हवाओं के कारण कई जगह बिजली के खम्बे टूट गए तो कही बिजली का तार पर पेड़ गिरने से तार टूट गए| विद्युत विभाग के अधिकारी कर्मचारी द्वारा बिजली व्यवस्था चालू करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है, कई जगहों पर पेड़ रास्ते मे गिरने से आवागमन बाधित हुआ है|

असामायिक वर्षा एवं तेज हवा चलने से घरों को या अन्य जो नुकसान आरबीसी (रेवेनुए बुक सर्कुलर) के तहत देना है, उसकी आंकलन कल करने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। कल सभी फील्ड में आंकलन करके उचित कार्यवाही करेंगे।
-केवीएस चौधरी सिंगरौली कलेक्टर

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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