बृज भूषण शरण सिंह की पहलवानों को चुनौती “गंगा में मेडल बहाने से मुझे फांसी नहीं मिलेगी, सबूत हो तो जाकर पुलिस को दो”

बृज भूषण शरण सिंह की पहलवानों को चुनौती “गंगा में मेडल बहाने से मुझे फांसी नहीं मिलेगी, सबूत हो तो जाकर पुलिस को दो”

Brij Bhushan Sharan Singh challenges wrestlers :  बृज भूषण शरण सिंह और पहलवानों के बीच शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। आरोप, धरना, प्रदर्शन, गिरफ़्तारी से लेकर मामला अब गंगा में मेडल बहाने तक पहुँच गया है, हालाँकि घोषणा करने के बाद पहलवान कल हरिद्वार पहुँच भी गए थे लेकिन मेडल गंगा जी में बहाने का कार्यक्रम फ़िलहाल स्थगित कर दिया। अब इस मामले में बृज भूषण शरण सिंह सामने आये हैं उन्होंने पहलवानों को खुली चुनौती दी है।

करीब चार महीने पहले शुरू हुआ पहलवानों और कुश्ती संघ (WFI )के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह के बीच का विवाद बढ़ता ही जा रहा हैं, पहलवान उनकी गिरफ़्तारी, पद से हटाने की मांग कर रहे हैं इस बीच बृज भूषण को फांसी देने की भी मांग सामने आई।

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह आज एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी पहुंचे, उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पहलवानों के आन्दोलन का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि जो आरोप मेरे ऊपर लग रहे है, किसके साथ हुआ कब हुआ वो बताये , उन्होंने कहा – मैंने पहले भी कहा था कि अगर एक भी आरोप मेरे ऊपर साबित हो जाएगा तो मैं स्वयं फांसी पर लटक जाऊंगा। आज भी मैं उसी बात पर कायम हूँ।

बृज भूषण सिंह ने कहा कि 4 महीने हो गए वो मेरी फांसी चाहते हैं लेकिन सरकार मुझे फांसी नहीं दे रही है तो वो (पहलवान) अपना मेडल लेकर गंगा में बहाने जा रहे हैं। मुझ पर आरोप लगाने वालों गंगा में मेडल बहाने से बृज भूषण को फांसी नहीं मिलेगी। अगर तुम्हारे पास सबूत है तो पुलिस को न्यायालय को दो और न्यायालय मुझे फांसी देगा तो मुझे वो स्वीकार है, मैं फांसी पर चढ़ जाऊंगा।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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