लॉकडाउन के बीच दो पक्षों में खूनी संघर्ष, महुआ बीनने को लेकर हुए विवाद में 12 से ज्यादा घायल

लॉकडाउन के बीच दो पक्षों में खूनी संघर्ष, महुआ बीनने को लेकर हुए विवाद में 12 से ज्यादा घायल

टीकमगढ़/आमिर खान

कोरोना महामारी के बीच जहां पूरा पुलिस प्रशासन इससे निपटने में लगा हुआ है ऐसे में भी आपसी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। टीकमगढ़ में बड़ागांव थाने के अन्तर्गत आने वाले ग्राम ककरवाहा में दो पक्षों के बीच महुआ बीनने को लेकर खूनी संघर्ष हो गया। इस दौरान जहां जमकर लाठी, कुल्हाड़ी के साथ गोली भी चली। इस घटना में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। घटना की सूचना पर तत्काल मौके पर पुलिस पहुंची और घायलों को जिला अस्पताल भिजवाया गया। साथ मामले कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार ककरवाहा गांव के ही कुशवाहा और ठाकुर परिवार के बीच यह विवाद हुआ है। इस घटना में कुशवाहा परिवार के 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुशवाहा परिवार के घायलों में हरिराम कुशवाहा, घंसू कुशवाहा, मनुआ कुशवाहा, राजू, नवल, छोटा कुशवाहा गंभीर घायल हुए हैं। इस परिवार के दो सदस्यों को हरिराम के घन्सू को गोली के छर्रे लगे होने की बात भी कही जा रही है। हरिराम को हालत गंभीर होने पर उसे झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया है, वहीं दूसरे पक्ष में सुजान सिंह, मधुकर शाह, सत्यव्रत का घायल होना बताया जा रहा है। इन घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पुलिस ने अब तक गोली चलने कि बात नहीं स्वीकारी है। पुलिस के अधिकारियों का कहना है जांच के बाद ही इस मामले में कुछ कहा जा सकेगा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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