बिना रोके गाड़ी निकालने के बदले वन रक्षक ने लकड़ी व्यापारी से मांगी 10000 रुपये महीना रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा

वन रक्षक ने व्यापारी से कहा यदि तुम्हें अपनी लकड़ी की गाड़ी बिना रोके बिना चैक किये निकालनी है तो तुम्हें पैसे देने होंगे, उसने व्यापारी से 10 हजार रुपये महीना रिश्वत की मांग की।
Tikamgarh Bribe taking forest guard arrested

Tikamgarh Bribe taking forest guard arrested

सागर की लोकायुक्त पुलिस ने टीकमगढ़ वन विभाग में पदस्थ वन रक्षक को एक लकड़ी व्यापारी से 5000 रुपये  रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, वन रक्षक व्यापारी से उसकी लकड़ी से भरी गाड़ी बिना रोके जाने के बदले 10 हजार रुपये महीना मांग रहा था जिसकी शिकायत उसने लोकायुक्त एसपी सागर से की थी।

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं , सीएम के निर्देश पर  लोकायुक्त डीजी  योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्यवाही किए जाने के निर्देश सभी अधिकारियों को दिए हुए हैं जिसका लगातार परिणाम सामने आ रहा है, इसी क्रम में आज एक और भ्रष्ट शासकीय कर्मचारी रंगे हाथ पकड़ा गया है।

लोकायुक्त एसपी सागर योगेश्वर शर्मा ने जानकरी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के ग्राम बानपुर निवासी लकड़ी व्यापारी अरबाज खान ने उनके कार्यालय में एक शिकायती आवेदन दिया था , आवेदन में उन्होंने कुंडेश्वर वन चौकी टीकमगढ़ में पदस्थ वन रक्षक अरुण अहिरवार पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाये थे।

वन रक्षक ने 10 हजार रुपये महीना रिश्वत मांगी 

आवेदन में अरबाज खान ने बताया कि  वो अपने गांव में सत्कट्टा लकड़ी से तखत बनाकर बेचता है जिससे उसके परिवार को रोजी रोटी चलती है, उसने बताया कि वो इस लकड़ी को लेने के लिए टीकमगढ़ आता है और किसानों से उनके खेत की लकड़ी खरीदकर ले जाता है, रास्ते में कुंडेश्वर वन चौकी पड़ती है जहाँ पदस्थ वन रक्षक अरुण उससे उसकी गाड़ी बिना रोके जाने देने के बदले 10 हजार रुपये महीना रिश्वत मांग रहा है।

रिश्वत हाथ में आते ही आरोपी गिरफ्तार 

शिकायती आवेदन मिलने के बाद एसपी योगेश्वर शर्मा के निर्देश पर सागार लोकायुक्त टीम ने इसका सत्यापन किया जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई, इसपर एक ट्रैपदल बनाया गया और आरोपी वन रक्षक अरुण अहिरवार को  जग्गा चौराहा टीकमगढ़ पर व्यापारी अरबाज खान से 5000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया गया ।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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