उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। यहां उज्जैन के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। यहां एक ही पाषाण में गजानंद के 3 स्वरूप विराजित हैं। आज से गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है और मंदिर में भक्तों की भीड़ लगना भी शुरू हो गई है।
अब गणेशोत्सव के 10 दिन तक मंदिर में भक्तों की भीड़ दिखाई देने वाली है। यहां सभी चिंतामण, इच्छामन और सिद्धिविनायक के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचने वाले हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर मंदिर में विशेष सजावट भी की गई है।
पूरी होती है भक्तों की मनोकामना
चिंतामन गणेश मंदिर के बारे में यह मान्यता है कि यहां पर भक्त जो भी मनोकामना मांगते हैं, वह पूरी होती है। मंदिर में भक्त विशेष रूप से संतान प्राप्ति की मनोकामना के साथ पहुंचते हैं। यहां उल्टा स्वास्तिक बनाकर संतान की मनोकामना मांगी जाती है। जब इच्छा पूरी हो जाती है तो सीधा स्वास्तिक बनाया जाता है। इसके अलावा रक्षासूत्र बांधकर मनोकामना मांगने और पूरी होने पर उसे खोलने की मान्यता है। इस मंदिर में तुलादान का भी महत्व माना गया है। संतान प्राप्ति के बाद कई परिवार बच्चों के वजन के बराबर दान कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित करते हैं।
श्रीराम सीता ने की थी स्थापना
इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के मुताबिक ये आज का नहीं बल्कि त्रेता युग का मंदिर है। अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता जब यहां पर पहुंचे। तब वटवृक्ष के नीचे ये प्रतिमा प्रकट हुई ऐसी मान्यता है। भगवान राम ने यहां चिंतामण, लक्ष्मण ने इच्छामन और माता सीता ने यहां सिद्धिविनायक के नाम से श्री गणेश का पूजन किया था। यही वजह है कि यहां एक ही पाषाण में भगवान के 3 स्वरूपों को पूजे जाने की मान्यता है।
यहां मौजूद है लक्ष्मण बावड़ी
इस मंदिर में एक बहुत पुरानी बावड़ी भी मौजूद है। जिसे लक्ष्मण और बाणगंगा के नाम से पहचाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक श्रीगणेश के अभिषेक के लिए यहां पर जल उपलब्ध नहीं था इसलिए लक्ष्मण जी ने बाण चलाकर यहां से जलधारा निकाली। आज भी ये बावड़ी मंदिर में भक्तों की आस्था का केंद्र है।






