चलती वैन में लगी आग, लोगों ने कूदकर बचाई जान

चलती वैन में लगी आग, लोगों ने कूदकर बचाई जान

उज्जैन|योगेश कुल्मी| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में बुधवार सुबह एक वैन बीच सड़क पर धू-धूकर जलने लगी| आग लगने के बाद वैन (VAN) में सवार तीन लोगों ने कूद कर अपनी जान बचाई| जब तक दमकल पहुंचती, आग (Fire) ने पूरी गाड़ी को चपेट में ले लिया और देखते ही देखते वैन धू-धूकर जल गई।

जानकारी के मुताबिक उज्जैन के नानाखेड़ा क्षेत्र में एक वैन ने आग लग गई| लेकिन वैन में सवार लोगों को इसकी भनक भी नहीं लगी| पीछे से आए एक कार चालक ने इन्हें रोका और बताया कि आपकी गाड़ी में आग लग गई है। इसके बाद तीनों लोग वैन से बाहर निकल गए|

सिंधी काॅलोनी में रहने वाले मनोज गोठवाल, शैलेष और कमल कार में सवार थे। ये तीनों इंदौर के एक निजी कॉलेज में कार्यरत हैं और कॉलेज वैन से ही प्रतिदिन उज्जैन से आना-जाना करते हैं। बुधवार सुबह ये तीनों वैन में सवार होकर कॉलेज के लिए निकले थे। तभी वैन में आग लग गई| जैसे उन्हें आग लगने का पता चला साइड लगाकर चलती गाड़ी से ही छलांग लगा दी। इसके बाद तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। जब तक दमकल पहुंचती, आग ने पूरी गाड़ी को चपेट में ले लिया और देखते ही देखते वैन धू-धूकर जल गई।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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