उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की जरूरत है। ताजा मामले में मुंबई से आए एक श्रद्धालु को आरती में शामिल कराने का लालच देकर हजारों रुपये की ठगी कर ली गई। आरोपी ने खुद को मददगार बताकर पहले भरोसा जीता और फिर ऑनलाइन रकम लेकर गायब हो गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
मुंबई के विरार वेस्ट निवासी धीरज चोरघे 24 मई को महाकाल मंदिर दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात संतोष अकोड़िया नाम के युवक से हुई। आरोपी ने दावा किया कि वह आसानी से भस्म आरती की अनुमति दिलवा सकता है। श्रद्धालु ने उसकी बातों पर भरोसा किया और ऑनलाइन तीन हजार रुपये भेज दिए। इसके बाद आरोपी ने अलग-अलग बहाने बनाकर 1250 रुपये और ले लिए। कुल 4250 रुपये लेने के बावजूद उसने कोई अनुमति नहीं दिलवाई और बाद में अपना मोबाइल बंद कर लिया।
महाकाल भस्म आरती बुकिंग के नाम पर बढ़ रहे फर्जीवाड़े के मामले
महाकाल मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में गिना जाता है। यहां रोज सुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देशभर से पहुंचते हैं। आरती में सीमित लोगों को ही प्रवेश मिलता है, इसलिए कई बार श्रद्धालु जल्द अनुमति पाने के चक्कर में अनजान लोगों के झांसे में आ जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर बढ़ती ऑनलाइन सुविधाओं के साथ साइबर और ऑफलाइन ठगी के मामले भी सामने आने लगे हैं। कई ठग खुद को मंदिर से जुड़ा कर्मचारी, एजेंट या जानकार बताकर लोगों को फंसाने की कोशिश करते हैं। पुलिस अधिकारियों की सलाह है कि श्रद्धालु किसी भी व्यक्ति को नकद या ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि जरूर करें। मंदिर प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक प्रक्रिया के अलावा किसी भी निजी व्यक्ति पर भरोसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह, कैसे बचें ऐसे धोखाधड़ी से
धार्मिक यात्राओं के दौरान लोग अक्सर भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और इसी का फायदा ठग उठाने की कोशिश करते हैं। महाकाल मंदिर समेत देश के कई बड़े धार्मिक स्थलों पर समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां दर्शन, विशेष पूजा या वीआईपी प्रवेश के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठे गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रद्धालुओं को हमेशा मंदिर प्रशासन की आधिकारिक व्यवस्था का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी अजनबी व्यक्ति द्वारा जल्दी अनुमति दिलाने, विशेष प्रवेश कराने या नियमों से हटकर सुविधा देने का दावा किया जाए तो सतर्क हो जाना चाहिए। ऑनलाइन भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी की जांच जरूरी है। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या मंदिर प्रशासन को देना चाहिए।
महाकाल पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब आरोपी की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं उसने अन्य श्रद्धालुओं को भी इसी तरह निशाना तो नहीं बनाया। यह घटना श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सीख भी है कि आस्था के साथ सतर्कता रखना उतना ही जरूरी है जितना श्रद्धा रखना।






