उज्जैन में 12 अप्रैल से पंचकोशी यात्रा, दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु दो दिन पहले पहुंचे, युवाओं ने सोशल मीडिया से दूरी का लिया संकल्प

उज्जैन में 118 किलोमीटर लंबी पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन श्रद्धालु दो दिन पहले ही पहुंच गए हैं। दरअसल इस बार यात्रा में शामिल युवा छात्रों ने सोशल मीडिया का उपयोग न करने का संकल्प लिया है, वे फोन का इस्तेमाल सिर्फ परिवार से बात करने के लिए करेंगे।
उज्जैन में 12 अप्रैल से पंचकोशी यात्रा, दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु दो दिन पहले पहुंचे, युवाओं ने सोशल मीडिया से दूरी का लिया संकल्प

उज्जैन में 118 किलोमीटर लंबी पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह ऐसा है कि वे दो दिन पहले ही शहर पहुंचने लगे हैं। दरअसल इस साल यात्रा में एक खास पहलू देखने को मिल रहा है, जहां कई युवा छात्रों ने संकल्प लिया है कि वे यात्रा के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे। वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल परिवार से बात करने के लिए ही करेंगे। हर साल इस यात्रा में करीब 2 से 3 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।

दरअसल पंचकोशी यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का तय समय से पहले पहुंचना उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है। यह यात्रा नागचंद्रेश्वर मंदिर से शुरू होती है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु सबसे पहले नारियल चढ़ाकर भगवान से सफल यात्रा और शक्ति की प्रार्थना करते हैं। यह परंपरा यात्रियों को 118 किलोमीटर की इस लंबी पदयात्रा के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करती है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा के लिए पहुंच रहे

उज्जैन के आसपास के क्षेत्रों जैसे इंदौर, बड़नगर और इंगोरिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा के लिए पहुंच रहे हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर से जुड़ी शीला शर्मा ने बताया कि हर साल लगभग 2 से 3 लाख लोग इस यात्रा में शामिल होते हैं और यह संख्या हर वर्ष लगभग इतनी ही रहती है। यात्रा में हर उम्र के लोग शामिल होते हैं। कुछ श्रद्धालु पहली बार इस पदयात्रा पर निकले हैं, तो कई ऐसे भी हैं जो वर्षों से लगातार इस यात्रा में शामिल होते आ रहे हैं। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक परंपरा बन चुकी है, जिसमें नई और पुरानी पीढ़ी साथ-साथ चलती है।

इस बार युवाओं का सोशल मीडिया से दूरी बनाने का संकल्प भी चर्चा का विषय बना हुआ है। एक 11वीं कक्षा की छात्रा ने बताया कि उसने आस्था के चलते यह फैसला लिया है कि यात्रा के दौरान वह सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेगी और केवल परिवार से संपर्क के लिए ही फोन का इस्तेमाल करेगी। उसका मानना है कि इससे वह यात्रा के आध्यात्मिक अनुभव को बेहतर तरीके से महसूस कर सकेगी।

परिवार के साथ शामिल होने की परंपरा भी साफ दिखाई दी

दरअसल यात्रा में परिवार के साथ शामिल होने की परंपरा भी साफ दिखाई देती है। करौंदिया गांव से आईं मनीषा भाटी अपने परिवार के साथ पहली बार इस यात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दादी भी पहले यह यात्रा कर चुकी हैं। वहीं राज कुंवर बाई ने बताया कि वे पिछले तीन साल से लगातार पंचकोशी यात्रा कर रही हैं और उनकी बहनें भी अलग-अलग गांवों से आकर उनके साथ इस धार्मिक यात्रा में शामिल होती हैं।

पंचकोशी यात्रा में शारीरिक चुनौतियां भी आती हैं, लेकिन श्रद्धालु अपनी आस्था से उन्हें पार करते हैं। बांसवाड़ा गांव से आईं रता बाई ने बताया कि उन्हें चलने में थोड़ी परेशानी होती है, फिर भी वे धीरे-धीरे पूरी यात्रा करती हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान जहां भी पड़ाव होता है, वहीं सभी मिलकर खाना बनाते हैं और दाल-रोटी तथा चावल उनका मुख्य भोजन होता है।

इस लंबी पदयात्रा के लिए श्रद्धालु पूरी तैयारी के साथ निकलते हैं। श्याम कुंवर ने बताया कि वे अपने घर से घी, आटा, दाल, कपड़े और जरूरी सामान साथ लेकर आए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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