मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के बाद शिप्रा नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट के किनारे स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं। रामघाट और दत्त अखाड़ा को जोड़ने वाला पुल भी जलमग्न हो गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गहरे पानी में नहीं उतरने और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करने की अपील की है।
अधिकारियों के अनुसार, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते सोमवार को शिप्रा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। इसके कारण रामघाट के किनारे बने कई छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और नदी का जलस्तर और बढ़ा तो अन्य मंदिरों के भी पानी में डूबने की आशंका जताई गई है।
शिप्रा नदी उफान पर
उज्जैन में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही भारी बारिश ने शिप्रा नदी को उफान पर ला दिया है। नदी के बढ़ते जलस्तर से राम घाट के किनारे बने कई प्राचीन मंदिर आंशिक रूप से पानी में डूब गए हैं। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है और पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न उतरने की सख्त चेतावनी दी है।
गहरे पानी में न जाने की चेतावनी
रामघाट होम गार्ड नाइट पेट्रोल इंचार्ज राशिद खान ने एएनआई को बताया कि शनिवार रात से लगातार बारिश हो रही है। रामघाट और दत्त अखाड़ा को जोड़ने वाले पुल पर करीब 7 से 8 फीट तक पानी भर गया है, जिससे इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि घाट क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर श्रद्धालुओं को लगातार लाउडस्पीकर और पुलिसकर्मियों के माध्यम से गहरे पानी में न जाने की चेतावनी दी जा रही है। लोगों से सिर्फ घाट की सुरक्षित सीढ़ियों तक ही स्नान करने की अपील की जा रही है ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रामघाट क्षेत्र में अतिरिक्त होमगार्ड और पुलिस बल तैनात किया गया है। नाइट शिफ्ट में दस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जबकि दिन के समय 15 से 20 अधिकारी निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।






