उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब तेज हो रही हैं। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने रविवार को उज्जैन का दौरा किया है और एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। उन्होंने शहर में चल रहे कई निर्माण कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया है। इस दौरान डॉ. राजौरा ने सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने कार्यों की स्पष्ट समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगामी सिंहस्थ मेले के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जा सकें। उनका यह दौरा और निर्देश यह साफ दिखाता है कि प्रशासन सिंहस्थ 2028 को एक सुनियोजित और बिना किसी कमी के संपन्न कराने के लिए पूरी गंभीरता से जुटा हुआ है।

दरअसल बैठक के दौरान, डॉ. राजौरा ने सिंहस्थ 2016 में पदस्थ रहे अधिकारियों के अनुभवों का अधिक से अधिक और प्रभावी ढंग से उपयोग करने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि उन अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए प्रशासनिक नोट्स का गहराई से अध्ययन किया जाए। इन नोट्स में भीड़ प्रबंधन की जटिलताएं, यातायात नियंत्रण की चुनौतियां, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़ी बहुमूल्य जानकारियां, सफल रणनीतियां और पिछली बार के अनुभव शामिल हैं।

रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाना मकसद

इन अनुभवों का उपयोग करके भविष्य में किसी भी संभावित समस्या या अव्यवस्था से बचने के लिए बेहतर और सटीक योजनाएं बनाई जा सकती हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पिछली गलतियों को दोहराने से बचना और सफल रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। यह तरीका किसी भी बड़े आयोजन की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

स्थायी कार्यों की मौजूदा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की

अपर मुख्य सचिव ने मेले के दौरान होने वाले अस्थाई प्रकृति के कार्यों की योजना को व्यवस्थित और मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि पूरे सिंहस्थ मेले का सफल संचालन इन अस्थाई व्यवस्थाओं पर भी काफी हद तक निर्भर करता है, क्योंकि ये सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी होती हैं। अस्थाई कार्यों में श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी आवास (टेंट सिटी), भोजन वितरण केंद्र, स्वच्छ पेयजल और शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था, मोबाइल चिकित्सा इकाइयां, सुरक्षा चौकियां और अस्थायी पहुंच मार्ग व पार्किंग स्थल जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। इन कार्यों की योजना बनाना और उन्हें समय पर लागू करना स्थायी ढांचों के निर्माण जितना ही चुनौतीपूर्ण होता है, बल्कि कई बार उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इन्हें कम समय में तैयार कर सुचारू संचालन सुनिश्चित करना होता है। संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने बैठक में स्थायी कार्यों की मौजूदा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की है और साथ ही अस्थाई व तात्कालिक कार्यों की एक संभावित कार्ययोजना का भी विस्तृत ब्योरा दिया है।

डॉ. राजौरा ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कार्यों की एक स्पष्ट, यथार्थवादी और समय-बद्ध कार्ययोजना तैयार करें। उन्हें यह योजना अगली समीक्षा बैठक में विस्तार से प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विभाग एक साथ और समन्वित तरीके से काम करें, जिससे किसी भी कार्य में अनावश्यक देरी न हो और तय समय पर सभी तैयारियां पूरी हो सकें। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के लिए, जहां कई सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियां एक साथ काम करती हैं, विभागों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी होता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी संसाधनों का सही उपयोग हो और कोई भी महत्वपूर्ण काम छूट न जाए।

बैठक समाप्त होने के बाद, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने अधिकारियों के साथ उज्जैन शहर में चल रहे प्रमुख निर्माण कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया है। उन्होंने सबसे पहले अंगारेश्वर मंदिर के पास शिप्रा नदी पर बन रहे नए घाटों का जायजा लिया है। ये नए घाट श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन के लिए अधिक सुविधा और सुरक्षित स्थान प्रदान करेंगे। कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री भी इन घाटों का निरीक्षण करने पहुंचे थे, जो इस परियोजना की महत्ता को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने कार्तिक मेला ग्राउंड से नई खेड़ी तक बन रहे 2.6 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का अवलोकन किया है। यह मार्ग सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुगम बनाने, भीड़ को नियंत्रित करने और शहर के बाहरी हिस्सों से कनेक्टिविटी बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों को लाभ मिलेगा।

निरीक्षण के दौरान, डॉ. राजौरा ने भूखी माता ब्रिज के निर्माण कार्य को भी करीब से देखा है और उसकी प्रगति का आकलन किया है। अधिकारियों ने उन्हें बताया है कि इस महत्वपूर्ण ब्रिज का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद ब्रिज को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी रोड भी जनवरी 2027 तक तैयार हो जाएगी। यह पुल सिंहस्थ के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन को सुचारू बनाएगा और विशेष रूप से दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा प्रदान करेगा। इसके अलावा, अपर मुख्य सचिव ने गेल चौराहे से शांति नगर के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य की प्रगति पर भी अपनी संतुष्टि व्यक्त की है। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य उज्जैन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है ताकि सिंहस्थ 2028 के लिए शहर पूरी तरह से तैयार हो सके और लाखों श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।