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उज्जैन सिंहस्थ ब्रिज निर्माण में सुस्ती देख भड़के संभागायुक्त, एजेंसी पर 5 लाख का ठोका जुर्माना

Written by:Ankita Chourdia
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सिंहस्थ 2028 महापर्व की तैयारियों में जुटी उज्जैन नगरी में ब्रिज निर्माण की धीमी गति देख संभागायुक्त भड़क उठे। दरअसल उन्होंने निर्माण एजेंसी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना ठोकते हुए काम में तेजी लाने के दो टूक निर्देश दिए है।
उज्जैन सिंहस्थ ब्रिज निर्माण में सुस्ती देख भड़के संभागायुक्त, एजेंसी पर 5 लाख का ठोका जुर्माना

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 महापर्व की तैयारियों के बीच शिप्रा नदी के तट पर निर्माणाधीन ब्रिजों की धीमी गति ने संभागायुक्त आशीष सिंह को खासा नाराज कर दिया। दरअसल करोड़ों श्रद्धालुओं और संत महात्माओं के सुगम आवागमन व भीड़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण इन पुलों के निर्माण में हो रही देरी पर संभागायुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्माण एजेंसी पर पांच लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया। वहीं उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिंहस्थ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के लिए चल रहे कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

दरअसल बुधवार को स्वयं संभागायुक्त एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह तथा कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से निर्माण कार्यों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे चल रहे विभिन्न ब्रिज निर्माण परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। अधिकारियों ने एक-एक बिंदु पर जानकारी ली और मौके पर मौजूद इंजीनियरों व ठेकेदारों से कार्य की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित समय सीमा पर विशेष जोर दिया।

कछुआ चाल से संभागायुक्त बेहद खफा दिखे

वहीं निरीक्षण के क्रम में श्री अंगारेश्वर मंदिर से सिद्धवट मंदिर को जोड़ने वाले रणनीतिक महत्व के ब्रिज के निर्माण स्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि यहां कार्य की गति अत्यंत धीमी है। इस पुल का निर्माण सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, लेकिन इसकी कछुआ चाल से संभागायुक्त बेहद खफा दिखे। उन्होंने मौके पर ही निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों को तलब किया और उनसे इस विलंब का कारण पूछा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संभागायुक्त का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने तुरंत प्रभाव से निर्माण एजेंसी पर पांच लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के निर्देश जारी कर दिए। संभागायुक्त ने दो टूक कहा कि निर्धारित समय सीमा में काम पूरा न होने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर श्रद्धालुओं की सुविधा से समझौता नहीं किया जाएगा।

क्वालिटी कंट्रोल लैब का भी निरीक्षण किया

इसके साथ ही, अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर स्थापित क्वालिटी कंट्रोल लैब का भी सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। उन्होंने लैब में निर्माण सामग्री की जांच प्रक्रियाओं और गुणवत्ता मानकों की पड़ताल की। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि निर्माण में उपयोग की जा रही प्रत्येक सामग्री की जांच नियमित रूप से की जाए और उसकी रिपोर्ट को विधिवत रजिस्टर में दर्ज किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि गुणवत्ता ही टिकाऊ और सुरक्षित निर्माण की कुंजी है।

इनका भी निरीक्षण किया

निरीक्षण का यह दौर केवल अंगारेश्वर-सिद्धवट ब्रिज तक ही सीमित नहीं रहा। कलेक्टर और मेला अधिकारी ने इंदौर रोड स्थित डी मार्ट के सामने चल रहे महत्वपूर्ण रोड निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया। यह सड़क सिंहस्थ के दौरान यातायात के दबाव को कम करने में सहायक होगी। इसी तरह, त्रिवेणी हिल्स से सिकंदरी के बीच शिप्रा तट पर चल रहे एक अन्य ब्रिज निर्माण कार्य की प्रगति भी देखी गई। इन सभी स्थलों पर अधिकारियों ने निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की गति और निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए, ताकि सिंहस्थ से पहले सभी परियोजनाएं पूर्ण हो सकें।

संभागायुक्त आशीष सिंह ने सभी संबंधित विभागों और निर्माण एजेंसियों को सख्त हिदायत दी कि सिंहस्थ 2028 महापर्व की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परियोजनाओं को तय समय सीमा में हर हाल में पूरा किया जाए ताकि महापर्व से पहले सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से स्थापित की जा सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि काम में किसी भी तरह की ढिलाई या लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। संभागायुक्त के इस कड़े रुख से निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

Ankita Chourdia
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