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उज्जैन से बड़ा मामला आया सामने! यादव समाज ने एक परिवार को किया निष्कासित, युवक ने धर्म परिवर्तन की दी धमकी

Written by:Banshika Sharma
Published:
उज्जैन के बड़नगर में एक युवक ने यादव समाज पर सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए न्याय न मिलने पर धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है। जानिए यह पूरा मामला क्या है?

आज इक्कीसवीं सदी में, जब हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान और न्याय मिले, जहाँ सामुदायिक सौहार्द सर्वोच्च हो, तब भी मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से आई एक खबर इस कल्पना को निर्ममता से तोड़ देती है। दरअसल यह घटना न केवल चौंकाने वाली है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे तथाकथित समाज के ठेकेदार अपनी मनमानी और वर्चस्व को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यादव (अहीर) समाज के एक युवक ने अपने ही समाज के पंचों पर सामाजिक बहिष्कार, घोर अपमान और असहनीय मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसने एक बार फिर सामाजिक व्यवस्थाओं में व्याप्त विसंगतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल पीड़ित नरेंद्र यादव ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई और शिकायत सौंपते हुए एक ऐसी चेतावनी दी है जो पूरे प्रशासनिक तंत्र और समाज को सोचने पर मजबूर करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उन्हें और उनके परिवार को न्याय नहीं मिला, यदि दोषियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने को मजबूर होंगे। यह बयान केवल एक धमकी नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की गहरी पीड़ा और हताशा है जिसे अपने ही समाज ने दरकिनार कर दिया है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

वहीं इस पूरे विवाद की जड़ एक शादी समारोह से जुड़ी है, जो डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित किया गया था। बताया जाता है कि इस समारोह में समाज की ओर से ₹5100 चंदे के रूप में तय किए गए थे, लेकिन समाजजनों ने ₹11 हजार की मांग कर दी, साथ ही धर्मशाला के किराए को लेकर भी विवाद था। इसी विषय पर समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में गहन चर्चा चल रही थी। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि यदि किसी से कोई गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर बढ़ी हुई राशि को वापस कर देना चाहिए। यह टिप्पणी इतनी सामान्य और तार्किक थी कि किसी को भी इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन यही टिप्पणी उनके लिए मुसीबत का सबब बन गई।

समाज छोड़ने तक की बात कह डाली

नरेंद्र यादव के अनुसार, उनकी इस टिप्पणी के बाद समाज के एक प्रभावशाली पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें वॉट्सऐप कॉल कर न केवल अपशब्द कहे बल्कि उन्हें समाज छोड़ने तक की बात कह डाली। यह व्यवहार इतना अपमानजनक था कि नरेंद्र ने इसकी जानकारी तुरंत समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में भी दी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी भी सदस्य ने इस अन्यायपूर्ण व्यवहार का विरोध नहीं किया। इसके बाद तो जैसे अधिकारियों का एक झुंड ही उन पर टूट पड़ा। अन्य पदाधिकारियों द्वारा भी उन्हें लगातार फोन पर गाली-गलौज और धमकियां देने का आरोप लगाया गया है, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित किया।

जानिए पीड़ित युवक ने क्या कहा?

इस घटनाक्रम के बाद तो हद ही हो गई। पीड़ित युवक का कहना है कि बिना उनका पक्ष सुने, बिना किसी निष्पक्ष बैठक या सुनवाई के, समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को समाज से निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। और तो और, गांव में समाज के किसी भी कार्यक्रम या सामाजिक गतिविधियों में उनके परिवार के शामिल होने पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई, मानो उन्हें अछूत घोषित कर दिया गया हो। यह कृत्य न केवल अमानवीय है बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार का भी खुला उल्लंघन है।

नरेंद्र यादव ने आरोप लगाया है कि समाज की धर्मशाला के किराए और चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का विरोध करने के कारण ही कुछ प्रभावशाली पंच उनसे नाराज हो गए थे और इसी नाराजगी का खामियाजा उन्हें सामाजिक बहिष्कार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत उन्होंने पहले एसपी कार्यालय में भी की थी, लेकिन अफसोस की बात है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में समाज की एक बैठक हुई भी, लेकिन उसमें उन्हें बुलाया तक नहीं गया और केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को खत्म मान लिया गया, जो कि न्याय के साथ एक क्रूर मजाक से कम नहीं।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

लगातार हो रहे सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना से बुरी तरह परेशान नरेंद्र यादव ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान वापस नहीं मिला और दोषी पंचों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाने के साथ-साथ परिवार सहित मुस्लिम धर्म अपनाने पर भी गंभीरता से विचार करेंगे। फिलहाल, जिला प्रशासन ने पीड़ित की शिकायत को जांच में लेते हुए उचित वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इस संवेदनशील मामले में न्याय दिला पाता है और क्या नरेंद्र यादव को अपने ही समाज में सम्मान वापस मिल पाता है या नहीं। यह घटना समाज के उन ठेकेदारों के लिए एक सबक होनी चाहिए जो अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर दूसरों के जीवन को नरक बनाने पर आमादा रहते हैं।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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