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बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हाथियों की पिकनिक, मौज मस्ती व आराम, खाने में मिलेगा केला, गन्ना, सेव फल, मल्टी विटामिन का लेप लगी रोटियां

Written by:Atul Saxena
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महावत नहलाते हैं उसके बाद इन्हें तेल से मालिश कराई जाती है फिर डॉक्टर की टीम इनका स्वास्थ्य की जांच करती है और उसके बाद इन्हें लाइन में खड़ा करने के साथ इनकी आव भगत शुरू होती है।
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में हाथियों की पिकनिक, मौज मस्ती व आराम, खाने में मिलेगा केला, गन्ना, सेव फल, मल्टी विटामिन का लेप लगी रोटियां

बांधवगढ़ नेशनल पार्क उमरिया देश विदेश में बाघों के लिए प्रसिद्द है यहाँ आने वाले पर्यटक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में खुले में बाघों को घूमते देख सकते हैं लेकिन यहाँ हम बाघों की नहीं हाथियों की बात करने वाले हैं, बांधवगढ़ नेशनल पार्क में अगले सात दिन केवल हाथियों की बात होगी क्योंकि उनकी पिकनिक शुरू हो गई है।

बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सुरक्षा सहित अन्य शासकीय कार्यों में हाथी बड़ी भूमिका निभाते हैं और  इसीलिए बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन इनके स्वस्थ, इनकी सेहत, इनके आराम के लिए सात दिन इनकी पिकनिक आयोजित करता है, इन सात दिनों में हाथियों से कोई काम नहीं लिया जाता बल्कि इनका मनपसंद हेल्दी भोजन दिया जाता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर साल होने वाली हाथियों की पिकनिक इस साल भी शुरू हो गई है 7 दिन चलने वाली हाथियों की पिकनिक में हाथियों से किसी प्रकार का कोई भी कार्य नहीं लिया जाएगा इतना ही नहीं हाथियों का पसंदीदा भोजन देने के बाद हाथियों को विचरण के लिए जंगल में छोड़ दिया जाएगा पशु चिकित्सकों की टीम हाथियों के स्वास्थ्य की जांच करने के साथ उनके ब्लड सैंपल लेकर लैब भेजे जाएंगे जिससे कि उनके स्वास्थ्य की जांच रिपोर्ट प्रबंधन को मिल सके।

15 हाथियों की 7 दिन तक चलेगी पिकनिक 

बांधवगढ़ में 12 हाथियों के साथ तीन शावक भी हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे बुजुर्ग हाथी गौतम 79 वर्ष का है जबकि सबसे छोटी गंगा की उम्र एक वर्ष है, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन हाथियों से विभागीय कार्य लिए जाते हैं जंगल ट्रैकिंग के साथ रेस्क्यू और गश्त में हाथियों की मदद ली जाती है।

ऐसे होती है हाथियों की सेवा 

बता दें,  ताला परिक्षेत्र के जंगलों में हाथियों की पिकनिक होती है जिसमें हाथियों को सबसे पहले नहलाया जाता है चरण गंगा नदी में इन्हें महावत नहलाते हैं उसके बाद इन्हें तेल से मालिश कराई जाती है फिर डॉक्टर की टीम इनका स्वास्थ्य की जांच करती है और उसके बाद इन्हें लाइन में खड़ा करने के साथ इनकी आव भगत शुरू होती है जिसमें इन्हें सबसे पहले गन्ना, सेव फल,  नारियल, मल्टी विटामिन  का लेप लगी रोटियां दी जाती हैं।

टाइगर रिजर्व प्रबंधन  करता है विशेष इंतजाम

सात दिन की पिकनिक के लिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन विशेष इंतजाम करता है टाइगर रिजर्व प्रबंधन पिकनिक में आसपास के क्षेत्र के लोगों को भी बुलाता है और बच्चे बड़े बुजुर्ग सभी हाथियों को अपने हाथों से फल खिलाते हैं टाइगर रिजर्व प्रबंधन का उद्देश्य रहता है कि हाथी और वन्य प्राणी मानव से जुड़े हुए हैं। इनका संरक्षण करना चाहिए। हाथियों के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए सैंपल जबलपुर के साथ हाथियों के महावतों को भी हाथी विशेषज्ञ जानकारी देते हैं।

उमरिया से ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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