पंचायत सचिव का कारनामा, जिंदा को बता दिया मृत, कई पात्र ग्रामीणों का सरकारी योजनाओं से हटाया नाम, जांच के आदेश

पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लग रहे हैं और ग्रामीण न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है।
Umaria Panchayat Secretary allegations

Umaria Panchayat Secretary allegations

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की बड़ा गांव पंचायत में पदस्थ सचिव की मनमानी का मामला सामने आया है, सचिव ने कई ग्रामीणों का नाम शासकीय योजनाओं की सूची से हटाकर उन्हें लाभ से वंचित कर दिया है, ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला पंचायत सीईओ से की है, सीईओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

उमरिया जिले के बड़ा गांव ग्राम पंचायत में इन दिनों पंचायत सचिव की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव रामू सोनी द्वारा मनमानी तरीके से काम किया जा रहा है। उसने किसी ग्रामीण को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया, तो किसी को सरकारी नौकरी होने का हवाला देकर योजनाओं का लाभ देने से इनकार कर दिया गया है  ग्रामीणों का कहना है कि सचिव खुलेआम यह दावा करता है कि मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संरक्षण प्राप्त है और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

सीईओ से पंचायत सचिव की शिकायत  

ग्रामीणों ने एकजुट होकर सचिव की शिकायत जिला पंचायत सीईओ से की है, ग्रामीणों ने लिखित में आवेदन देकर प्रमाण दिए है खास बात ये है कि शिकायत करने वालों में वो ग्रामीण भी शामिल है जिसे पंचायत सचिव ने कागजों में मृत घोषित कर दिया है, ग्रामीणों की शिकायत पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ओहरीया ने कहा कि शिकायत मिली है वे इस प्रकरण की जांच करवाएंगे और यदि सचिव ने नियम विरुद्ध काम किया है तो नियमानुसार एक्शन लिया जायेगा।

लोकायुक्त पुलिस भी ले चुकी है एक्शन 

उल्लेखनीय है कि पंचायत सचिव रामू सोनी का विवादों से पुराना नाता है, एक प्रकरण में उसपर लोकायुक्त ने भी कार्रवाई की है तब उसका तबादला कर दूसरी जगह भेज दिया गया, हालाँकि उसे निलंबित नहीं किया गया, जिस पर सीईओ सरकारी नियमों का हवाला दे रहे हैं, बहरहाल इस मामले में पूरे प्रमाण सामने है अब देखना होगा जिला प्रशासन पंचायत सचिव रामू सोनी के विरुद्ध क्या एक्शन लेता है?

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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