जल, जंगल और जमीन पर अधिकारों सहित विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय दलित आदिवासी महासभा के बैनर तले उमरिया में एक विशाल रैली निकाली गई। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची। जहां अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने आवाज बुलंद की।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद ज्ञापन सौंपने को लेकर करीब दो घंटे तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। महासभा के प्रतिनिधियों और प्रदर्शन में शामिल आदिवासियों का कहना था कि वे अपना ज्ञापन सीधे उमरिया कलेक्टर को ही सौंपेंगे। अपनी इस मांग पर प्रदर्शनकारी अड़े रहे और कलेक्टर से मुलाकात की मांग करते रहे। काफी देर तक इंतजार करने के बाद आखिरकार उमरिया कलेक्टर को बाहर आना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन स्वीकार किया।
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अधिकारों पर गंभीरता से विचार करने की मांग
रैली के माध्यम से आदिवासी समुदाय ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों और वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टे उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उनके अधिकारों से जुड़े मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाए और पात्र हितग्राहियों को उनका हक दिलाया जाए।
वन अधिकार पट्टों को लेकर अपर कलेक्टर ने दिया आश्वासन
इस मामले में उमरिया के अपर कलेक्टर ने मीडिया का कहना है वन अधिकार के पट्टे बनाए गए हैं। जिन हितग्राहियों के पट्टे निरस्त हो गए हैं, उनके मामलों की दोबारा जांच कर पात्र पाए जाने पर पट्टे बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वन अधिकार के पट्टे हितग्राहियों के घर-घर तक पहुंचाने की कवायद जारी है।
इस रैली ने एक बार फिर आदिवासी समुदाय के अधिकारों और वन अधिकार पट्टों से जुड़े मुद्दों को प्रशासन के सामने प्रमुखता से रखा। अब प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगों पर प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।
उमरिया से बृजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट
