प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को रामपुर के चर्चित ‘यतीम खाना’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक और बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने आजम खान और सह-आरोपी वीरेंद्र गोयल समेत सभी याचिकाकर्ताओं को मिली अंतरिम राहत की अवधि 24 मार्च तक के लिए बढ़ा दी है।
इस आदेश का सीधा मतलब है कि रामपुर की ट्रायल कोर्ट फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं सुना सकती है। हाईकोर्ट ने पहले ही निचली अदालत को अंतिम आदेश पारित करने से अंतरिम रूप से रोक रखा था, जिसे अब आगे बढ़ा दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि ट्रायल कोर्ट इस केस में जल्द ही अपना फैसला सुना सकती है।
क्यों हाईकोर्ट पहुंचे आजम खान?
दरअसल, आजम खान और उनके सहयोगी वीरेंद्र गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निचली अदालत द्वारा अंतिम फैसला सुनाए जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। अपनी याचिका में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गवाहों की दोबारा गवाही और वीडियो फुटेज को रिकॉर्ड पर लाने की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब तक मुख्य गवाहों से दोबारा जिरह नहीं होती और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्यों को न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनाया जाता, तब तक निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। उन्होंने हाईकोर्ट से ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करने की अपील की है। इस स्थगनादेश से आजम खान को अपनी कानूनी लड़ाई की तैयारी के लिए और समय मिल गया है।
क्या है रामपुर का यतीम खाना मामला?
यह पूरा विवाद साल 2016 के एक प्रकरण से जुड़ा है। 15 अक्टूबर 2016 को रामपुर में स्थित यतीम खाना, जो कि एक वक्फ संपत्ति (संख्या 157) है, पर बने कुछ कथित अनधिकृत ढांचों को बलपूर्वक ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई थी। इसी मामले में साल 2019 में रामपुर के कोतवाली थाने में आजम खान और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
हाईकोर्ट इस मामले में सह-आरोपी मोहम्मद इस्लाम उर्फ इस्लाम ठेकेदार, शाहिद प्रधान और आले हसन खान की याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर संयुक्त रूप से सुनवाई करने का आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई अब निर्धारित तिथि 24 मार्च को होगी।





