धार्मिक अकीदत और सामाजिक सौहार्द के अनुपम संगम के साथ इस बार आगरा में बकरीद का पर्व मनाया गया। मोहब्बत की नगरी आगरा में यह त्योहार सिर्फ परंपरागत धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। गुरुवार को ईद-उल-अजहा के पावन अवसर पर ताजमहल की शाही मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए खुदा से दुआएं मांगीं। इसी पवित्र मौके पर मुस्लिम महापंचायत द्वारा एक अनूठी और महत्वपूर्ण पहल की गई। नमाज के उपरांत ईदगाह के बाहर जुटे महापंचायत के सदस्यों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को पुरजोर तरीके से प्रदर्शित किया।
यह मांग देश की संस्कृति और करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक गौ माता की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। महापंचायत के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि गाय का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के सरपंच नदीम नूर और पदाधिकारी अमजल कुरैशी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देता है। मुस्लिम समुदाय भी गाय का अपमान सहन नहीं करता। समाज में नफरत फैलाने वाले तत्वों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है। आगरा की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह नगरी सदैव हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रही है। इस पहल का मूल उद्देश्य समाज में सौहार्द और आपसी विश्वास को और सुदृढ़ करना है।
मुस्लिम समाज ने देश में अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ
नदीम नूर ने सरकार से गंभीर अपील करते हुए कहा कि देश में गौ तस्करी और गायों पर हो रहे अत्याचारों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। बकरीद के इस पावन पर्व पर मुस्लिम समाज के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मुल्क की अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली के लिए सामूहिक दुआएं कीं। नमाज के पश्चात लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर त्योहार की मुबारकबाद दी। तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद नमाजियों में विशेष उत्साह परिलक्षित हुआ और वे उत्साहपूर्वक पर्व में शामिल हुए।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा ईद-उल-अजहा के अवसर पर ताजमहल में पर्यटकों और नमाजियों के लिए निशुल्क प्रवेश की विशेष व्यवस्था की गई। सुबह सात बजे से दस बजे तक तीन घंटे के लिए टिकट विंडो बंद रखी गई, जिससे बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक इस ऐतिहासिक स्मारक का दीदार कर सके और शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा कर सके। इस महत्वपूर्ण अवसर पर ताजमहल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी की सहायता से चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी गई। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की पैनी नजर बनी रही ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या अव्यवस्था को फैलने से रोका जा सके और पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।






