कर्नाटक में आज एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राज्य की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिससे कई अटकलें लगाई जा रही हैं। सिद्धारमैया ने लोकभवन पहुंचकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह इस्तीफा उन्होंने सीधे राज्यपाल को नहीं बल्कि उनके विशेष सचिव प्रभु शंकर को सौंपा है।
राज्यपाल के विशेष सचिव, प्रभु शंकर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा प्राप्त हो गया है। हालांकि, इसे स्वीकार करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल की गैर-मौजूदगी के कारण ऐसा हुआ है। बताया जा रहा है कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस समय अपने गृह नगर मध्य प्रदेश के नागदा गए हुए हैं। उनके वापस आने के बाद ही वे इस इस्तीफे को विधिवत स्वीकार करेंगे।
इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया ने की बैठक
इस्तीफा देने से पहले, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ जलपान के दौरान बातचीत की और उन्हें अपने पद छोड़ने के फैसले से अवगत कराया। इस बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और पार्टी के नेता मौजूद थे, जिन्हें मुख्यमंत्री के इस निर्णय से जुड़ी जानकारी दी गई।
अपने पद से इस्तीफा देने के बाद, सिद्धारमैया ने तुरंत एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल के सचिव को सौंप दिया है। सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि उन्होंने यह कदम हाईकमान के निर्देशों का पालन करते हुए उठाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।
सिद्धारमैया ने आगे बताया कि उन्होंने पार्टी के हाईकमान को पहले ही अवगत करा दिया था कि वे गुरुवार को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। उन्होंने आज तय समय पर अपना इस्तीफा प्रस्तुत कर दिया है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक, राज्यपाल को उनके वापस आने के बाद इस इस्तीफे को स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने संवैधानिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा जताया।
सिद्धारमैया ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का जताया आभार
इस अवसर पर, सिद्धारमैया ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को धन्यवाद दिया। सिद्धारमैया ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण बयान भी दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘संविधान ही मेरे लिए धर्म है।’ यह बयान उनकी राजनीतिक विचारधारा और सिद्धांतों को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के बाद से उन्हें हर स्तर पर बहुत अधिक सहयोग और प्यार मिला है। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों का भी दिल से धन्यवाद किया। सिद्धारमैया ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान मिले समर्थन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
दिन में अपने आधिकारिक आवास पर कैबिनेट सहयोगियों के लिए आयोजित जलपान बैठक के बाद पाटिल ने यह बात कही थी। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के सूत्रों के अनुसार, पार्टी आलाकमान द्वारा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा था। यह दर्शाता है कि यह कदम एक पूर्व-निर्धारित योजना का हिस्सा था।
हालांकि, लोक भवन से जुड़े सूत्रों ने इस संबंध में अलग जानकारी दी है। इन सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने अब तक राज्यपाल से मिलने के लिए कोई समय नहीं मांगा था। यह जानकारी दोनों पक्षों के बयानों में थोड़ा विरोधाभास दिखाती है, लेकिन इस्तीफे की खबर की पुष्टि हो चुकी है। कर्नाटक की राजनीति में अब अगले मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, और कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
Karnataka CM Siddaramaiah submitted his resignation to Prabhu Shankar, Special Secretary to Karnataka Governor. Governor Thaawarchand Gehlot, who is out of the state, is returning tonight.
(Pics: Karnataka Lok Bhavan) pic.twitter.com/QF5UYFJaoq
— ANI (@ANI) May 28, 2026





