उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को आयुष विभाग, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग तथा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के लिए चयनित 481 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन रोजगार’ का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा निरंतर नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी सेवा में अवसर प्राप्त हुए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर सिफारिश या अनैतिक साधनों के उपयोग की कोई गुंजाइश नहीं रही। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह साफ नीयत और स्पष्ट नीति का ही परिणाम है कि योग्य अभ्यर्थियों को आज नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व में भर्तियां पैसों, जाति, मत, मजहब और क्षेत्र के आधार पर होती थीं, जिससे योग्य नौजवानों का शोषण होता था। उन्होंने आगाह किया कि यदि किसी अयोग्य व्यक्ति को घूसखोरी के माध्यम से व्यवस्था में स्थान मिलता, तो वह अगले 30-35 वर्षों तक पूरे सिस्टम को खोखला कर देता। इसी कारण सरकार ने पहले दिन से ही भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और लीकेज की संभावनाओं को समाप्त करने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जवाबदेही, तकनीक और पारदर्शिता के कारण आज उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक नियुक्तियां देने वाला राज्य बन चुका है।
9 वर्षों में नियुक्ति पत्र वितरण के बने नए रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि पिछले 9 वर्षों में सरकार ने नियुक्ति पत्र वितरण के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कोई सोच भी नहीं सकता था कि उत्तर प्रदेश के नौजवानों को निष्पक्ष, पारदर्शी व सहज प्रक्रिया से सरकारी नौकरियां मिल पाएंगी। विभिन्न आयोगों व बोर्डों को जवाबदेही सौंपने और तकनीक का उपयोग करने से हर योग्य नौजवान के साथ न्याय सुनिश्चित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप 9 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए गए हैं। यह पिछले 15 दिनों के भीतर चौथा नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम है।
मुख्यमंत्री ने 2017 से पूर्व के उत्तर प्रदेश की स्थिति का स्मरण कराते हुए कहा कि देश-दुनिया में लोग यूपी का नाम सुनते ही संदेह की दृष्टि से देखते थे और दस कदम पीछे हट जाते थे। उन्होंने बताया कि उस समय उत्तर प्रदेश को भ्रष्ट, गुंडा और अराजक प्रदेश बनाकर हर यूपीवासी के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया गया था। वर्तमान में स्थिति में परिवर्तन आया है। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब यूपी का नाम सुनते ही सामने वाले का चेहरा चमक उठता है और वह स्वागत के लिए उत्सुक दिखाई देता है। इसे परसेप्शन में बदलाव और उसके अनुरूप परिणामों का द्योतक बताया गया।
उत्तर प्रदेश बना देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री
उन्होंने प्रदेश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय, वार्षिक बजट व समग्र अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त हुई है। यूपी अब रेवेन्यू सरप्लस राज्य और देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। यह सर्वाधिक नियुक्ति पत्र देने वाला, सबसे अधिक एक्सप्रेसवे बनाने वाला, किसानों को सर्वाधिक प्रोत्साहन देने वाला और समाज के हर वर्ग को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने वाला प्रदेश बन गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पूर्व एमएसएमई क्षेत्र लगभग निष्क्रिय था और कोई प्रोत्साहन उपलब्ध नहीं था। आज देश में सर्वाधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उत्तर प्रदेश में संचालित हैं। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में 3 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि गत वर्ष उत्तर प्रदेश में 4000 से अधिक बड़े उद्योग स्थापित हुए और पिछले 9 वर्षों में बड़े उद्योगों की संख्या 14,000 से बढ़कर 32,000 से अधिक हो गई है। जिस उत्तर प्रदेश को पूर्व में देश के बॉटम-3 राज्यों में गिना जाता था, आज वह टॉप-3 राज्यों में सम्मिलित है।
आयुष विभाग की क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष हेल्थ टूरिज्म को आकर्षित करने की बड़ी क्षमता रखता है और इसके माध्यम से महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए जा सकते हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को ग्राम स्तर पर और सुदृढ़ करने तथा उपचार की पारंपरिक विधाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। मेडिसिनल प्लांट्स के उत्पादन के लिए किसानों से संवाद स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई गई। आज 202 प्राध्यापक, चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्सों को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनसे आयुष विभाग को गति मिलने की अपेक्षा है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
व्यावसायिक शिक्षा विभाग बना कौशल विकास का प्रमुख मंच
व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास विभाग को एक वृहद एवं महत्वपूर्ण मंच बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुकूल वातावरण और नीतियों के कारण लगातार बड़े निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं, इन उद्योगों को मांग के अनुरूप स्किल्ड मैनपावर उपलब्ध कराना इस विभाग तथा इसके अनुदेशकों की जिम्मेदारी है। व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 150 से अधिक आईटीआई को आधुनिक बनाया है। इन संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में सर्टिफिकेट कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ किए गए हैं। कुशल प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन व अन्य टेक्नीशियन भी तैयार किए जा रहे हैं। आज नियुक्त हुए 272 ट्रेंड अनुदेशक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण नामकरण के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी कारणवश दिव्यांगता का शिकार हो सकता है और उनके प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हर दिव्यांगजन में प्रतिभा निहित होती है, जिसे केवल सही मंच की आवश्यकता होती है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा पेंशन सुविधा, दो दिव्यांगजन विश्वविद्यालय की स्थापना, प्रत्येक कमिश्नरी मुख्यालय पर विशेष केंद्र खोलने और बंद पड़े डीआरसी (डिस्ट्रिक्ट रिहैबिलिटेशन सेंटर्स) को पुनः चालू करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इस अवसर पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास कपिल देव अग्रवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण नरेन्द्र कुमार कश्यप, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, तीनों विभागों के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, डॉ हरिओम और रंजन कुमार समेत अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति दर्ज की गई।
आज यूपी,
सबसे ज्यादा नियुक्ति-पत्र देने वाला,
सबसे ज्यादा एक्सप्रेस-वे बनाने वाला,
सबसे ज्यादा किसानों को इंसेंटिव देने वाला,सबसे ज्यादा वेलफेयर स्कीम के साथ जोड़ने वाला राज्य है… pic.twitter.com/gcmnEdHo0B
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 7, 2026






