
सपा सांसद डिंपल यादव ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंगलवार को दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। डिंपल यादव का कहना है कि मीटर बदले जाने के बाद आम लोगों के बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिससे उपभोक्ताओं में असंतोष और अविश्वास बढ़ रहा है।
उन्होंने चेताया कि यदि मीटरिंग की यही प्रक्रिया जारी रही और उपभोक्ताओं को पारदर्शी व स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, तो हालात जन आंदोलन की ओर बढ़ सकते हैं। डिंपल ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार का मीटर बदलाव उपभोक्ता की सहमति और पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
उपभोक्ता परिषद ने भी उठाए सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी मीटरिंग प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पूछा कि जब केंद्र सरकार की ओर से चेक मीटरिंग के लिए 5% मीटर छोड़ने का निर्देश था, तो उनका मिलान अब तक क्यों नहीं किया गया?
उनके मुताबिक, प्रदेश में अब तक 32,46,927 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 1,57,000 उपभोक्ताओं के पुराने मीटर चेक मीटरिंग के लिए छोड़े गए थे। लेकिन अब तक किसी की भी रीडिंग का मिलान नहीं किया गया है।
बिलिंग शुरू नहीं, फिर भी मीटर चालू
वर्मा ने आगे बताया कि 1,67,398 स्मार्ट प्रीपेड मीटर ऐसे हैं जिनकी बिलिंग अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है। ऐसे में जब इन उपभोक्ताओं को एकमुश्त बिल थमाया जाएगा, तो उनके सामने भुगतान को लेकर संकट खड़ा हो सकता है।
सॉफ्टवेयर बदला, लेकिन जांच नहीं
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में मीटर लगाने के बाद दो दर्जन से अधिक उपभोक्ताओं ने विद्युत भार में जंपिंग की शिकायत की थी। इसके बाद सॉफ्टवेयर में बदलाव तो किया गया, लेकिन आगे किसी भी स्तर पर तकनीकी जांच नहीं की गई। डिंपल यादव और उपभोक्ता परिषद की ओर से उठाए गए ये सवाल उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण की पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छेड़ रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और बिजली विभाग इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
