शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे यौन शोषण के आरोपों के मामले ने अब एक नया और हिंसक मोड़ ले लिया है। शंकराचार्य के समर्थन में उतरे श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी बाबा ने एक बेहद विवादित ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटेगा, उसे 21 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।
फलाहारी बाबा ने आशुतोष ब्रह्मचारी को ‘गौ हत्यारा’, ‘व्यभिचारी’ और ‘बलात्कारी’ बताते हुए कहा कि वह उन्हें हिंदू नहीं मानते। उन्होंने यह भी कहा कि आशुतोष को जूतों की माला पहनानी चाहिए। इस ऐलान के बाद संत समाज में हलचल तेज हो गई है।
क्यों भड़के फलाहारी बाबा?
फलाहारी बाबा ने शंकराचार्य को 125 करोड़ हिंदुओं के लिए पूजनीय बताया। उनका कहना है कि शंकराचार्य पर इस तरह के घिनौने आरोप लगाए जाने से सभी सनातनी हिंदू अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आशुतोष ब्रह्मचारी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके हिंदू होने पर धिक्कार है।
“शंकराचार्य हमारी गौ माता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सभी हिंदुओं के लिए वो पूजनीय हैं। ऐसे पूजनीय शंकराचार्य के लिए एक व्यभिचारी, बलात्कारी, गौ हत्यारा आशुतोष पांडे ऐसे घिनौने आरोप लगवा रहा है। हमारा भी ऐलान है कि जो कोई भी सनातनी भाई इस आशुतोष पांडे की नाक काटेगा, जूतों की माला पहनाएगा, उसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की तरफ से 21 लाख का इनाम दिया जाएगा।” — फलाहारी बाबा, अध्यक्ष, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास
फलाहारी बाबा ने यह भी मांग की कि सरकार को आशुतोष पांडे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि उन पर गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर, गौ हत्या, ठगी और रेप जैसे कई गंभीर आरोप हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कार्रवाई नहीं होगी, सनातनी चुप नहीं बैठेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के मामले में प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। यह FIR कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई। दरअसल, आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य ने अदालत में एक आवेदन दाखिल किया था।
याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायपालिका ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद शंकराचार्य के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ। इसी कानूनी कार्रवाई के जवाब में फलाहारी बाबा ने यह विवादित घोषणा की है।






