उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची में एक बड़ी खामी सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग की एक रिपोर्ट के बाद जिले के करीब 46.8 प्रतिशत यानी 13.25 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में आ गए हैं। प्रशासन अब इन सभी नामों का भौतिक सत्यापन करवा रहा है ताकि फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों को सूची से हटाया जा सके।
क्यों उठे वोटर लिस्ट पर सवाल?
दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने गाजीपुर जिला प्रशासन को एक विस्तृत सूची भेजी है। इस सूची में 13,25,998 मतदाता ऐसे हैं, जिनके नाम और पिता के नाम एक जैसे हैं। इतनी बड़ी संख्या में एक समान जानकारी होने के कारण इन मतदाताओं की स्थिति को संदिग्ध माना गया है। आशंका है कि एक ही व्यक्ति का नाम कई बार सूची में दर्ज हो सकता है। इसी को लेकर अब यह सघन जांच अभियान शुरू किया गया है।
आधार कार्ड से होगी असली-नकली की पहचान
इस बड़ी गड़बड़ी को ठीक करने के लिए जिला प्रशासन ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मैदान में उतारा है। BLO घर-घर जाकर सूची में दर्ज संदिग्ध मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। पहचान की पुष्टि के लिए उनसे उनके आधार कार्ड की जानकारी मांगी जा रही है।
सत्यापन प्रक्रिया के तहत मतदाता के आधार नंबर के अंतिम चार अंकों का मिलान किया जा रहा है। यदि दो समान नाम वाले व्यक्तियों के आधार नंबर अलग-अलग पाए जाते हैं, तो उनका नाम सूची में सुरक्षित रहेगा। लेकिन, अगर आधार नंबर भी एक ही मिलता है, तो उसे डुप्लीकेट वोटर मानकर सूची से हटा दिया जाएगा।
“शासन की ओर से एक सूची मिली है, जिसमें एक ही नाम और पिता के नाम वाले कई मतदाताओं का मामला है। इसके सत्यापन के लिए BLO को लगाया गया है। मतदाताओं से उनके आधार के अंतिम चार अंक लेकर मिलान किया जा रहा है और पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा रही है।” — संतोष कुमार वैश्य, मुख्य विकास अधिकारी
किस ब्लॉक में कितने संदिग्ध वोटर?
निर्वाचन आयोग द्वारा भेजी गई सूची में जिले के सभी 16 ब्लॉकों में संदिग्ध मतदाता चिन्हित किए गए हैं। इनमें सैदपुर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 1,11,614, कासिमाबाद में 1,05,700, सादात में 99,241 और जखनियाँ में 92,974 मतदाताओं का नाम शामिल है।
इसके अलावा मनिहारी में 91,754, देवकली में 89,500, बिरनो में 85,081, जमानिया में 83,156, मुहम्मदाबाद में 82,208 और सदर ब्लॉक में 80,402 मतदाताओं का फिर से सत्यापन किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य चुनाव से पहले एक पारदर्शी और साफ-सुथरी मतदाता सूची तैयार करना है।





