उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का नया द्वार खुल गया है। मंगलवार को प्रदेश सरकार और यूनाइटेड किंगडम के फारेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इसके तहत हर साल पांच मेधावी छात्रों को यूके के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में एक वर्षीय मास्टर डिग्री करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी और एफसीडीओ प्रतिनिधि ने इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह योजना सात अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई थी। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के मेधावी छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करना है। यह न केवल छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दिलाएगी, बल्कि उन्हें नवाचार और शोध के क्षेत्र में भी नए अवसर प्रदान करेगी। यह छात्रवृत्ति योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 से शुरू होगी और शुरुआती तीन वर्षों (2025-26, 2026-27 और 2027-28) तक चलेगी।
छात्रवृत्ति में शामिल होंगी ये सुविधाएं
इस छात्रवृत्ति के तहत पूर्ण शिक्षण शुल्क, परीक्षा और शोध शुल्क, रहने-खाने के लिए मासिक भत्ता, तथा उत्तर प्रदेश से यूके तक एक बार इकोनॉमी क्लास हवाई किराया शामिल होगा। प्रत्येक छात्र पर अनुमानित खर्च 38,048 से 42,076 पाउंड (लगभग 45 से 48 लाख रुपये) होगा। इसमें से 19,800 पाउंड (करीब 23 लाख रुपये) उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी, जबकि शेष राशि यूके का एफसीडीओ प्रदान करेगा। यह योजना छात्रों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देगी।
योजना का नवीनीकरण और दीर्घकालिक प्रभाव
वर्ष 2028-29 से इस योजना का नवीनीकरण कर इसे आगे जारी रखने की योजना है। यह पहल उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि प्रदेश की शैक्षणिक और शोध क्षमता को भी मजबूत करेगी। इस समझौते से उत्तर प्रदेश और यूनाइटेड किंगडम के बीच शैक्षिक सहयोग को नया आयाम मिलेगा।





