आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रियता तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने आज एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए कई दिग्गज नेताओं को अपने साथ जोड़ लिया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नाम पूर्व कांग्रेस प्रांतीय अध्यक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी का है, जिन्हें यूपी की राजनीति में मुस्लिम समाज का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है।
नसीमुद्दीन के अलावा अनीस अहमद खा उर्फ फूलबाबू और अपना दल सोनेलाल के पूर्व विधायक राजकुमार पाल सहित कुछ अन्य नेता भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं। यह कदम विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा के लिए अहम माना जा रहा है।
लखनऊ एयरपोर्ट पर एंट्री नहीं मिलने से भड़के थे नसीमुद्दीन
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उनके इस फैसले की पृष्ठभूमि में एक विवादास्पद घटना थी जो कुछ दिन पहले घटी थी। जब राहुल गांधी रायबरेली जाने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे थे, तब प्रांतीय अध्यक्ष होने के बावजूद नसीमुद्दीन को एयरपोर्ट पर प्रवेश नहीं मिला था।
राहुल गांधी को रिसीव करने पहुंचे नसीमुद्दीन को एयरपोर्ट से खाली हाथ लौटना पड़ा था। इस घटना ने उन्हें काफी आहत किया और उन्होंने कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ने का फैसला कर लिया। यह घटना कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक विवादों और नेतृत्व की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े करती है।
बसपा से भी रहा है गहरा रिश्ता
नसीमुद्दीन सिद्दीकी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। वे काशीराम के दौर से ही बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे हैं और मायावती के काफी करीबी माने जाते थे। जब कांग्रेस छोड़ने की खबरें आईं तब अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे बसपा में वापस लौट सकते हैं।
मायावती जब चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तब चारों बार नसीमुद्दीन सिद्दीकी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। यह उनकी राजनीतिक अहमियत और मायावती के साथ उनके संबंधों को दर्शाता है। हालांकि, इस बार उन्होंने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों में तेजी
समाजवादी पार्टी में इन नेताओं का शामिल होना अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी और प्रभावशाली नेता का जुड़ना पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। खासकर मुस्लिम वोट बैंक को साधने के लिहाज से यह कदम अहम है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस से नेताओं का पलायन पार्टी के लिए चिंता का विषय है, जबकि समाजवादी पार्टी अपनी ताकत बढ़ाने में जुटी है। आने वाले समय में इन नेताओं की भूमिका और समाजवादी पार्टी की रणनीति पर सभी की नजर होगी।





