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शाहजहांपुर में लाट साहब के जुलूस से पहले प्रशासन ने ढकीं 92 मस्जिदें, जानें पूरी परंपरा और इसका इतिहास

Written by:Gaurav Sharma
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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली पर निकलने वाले ऐतिहासिक 'लाट साहब' के जुलूस को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने जुलूस के रास्ते में पड़ने वाली 92 मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया है, ताकि कोई उन पर रंग न फेंक सके।
शाहजहांपुर में लाट साहब के जुलूस से पहले प्रशासन ने ढकीं 92 मस्जिदें, जानें पूरी परंपरा और इसका इतिहास

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली का त्योहार एक बेहद अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा के साथ मनाया जाता है, जिसे ‘लाट साहब का जुलूस’ कहते हैं। इस साल भी इस पारंपरिक जुलूस की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि, इस जुलूस की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में जुलूस के निर्धारित मार्गों पर पड़ने वाली 92 मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया गया है।

प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि होली के हुड़दंग में कोई भी शरारती तत्व मस्जिदों पर रंग या कोई आपत्तिजनक वस्तु न फेंके, जिससे शहर की शांति व्यवस्था भंग हो। डीएम और एसपी ने खुद जुलूस के मार्गों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया है और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।

क्या है यह ‘लाट साहब का जुलूस’

शाहजहांपुर की यह परंपरा अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह और गुस्से को दर्शाने का एक जरिया है। इस जुलूस में एक व्यक्ति को ‘लाट साहब’ (वायसरॉय का प्रतीक) बनाया जाता है। उसे एक भैंसा गाड़ी पर बिठाया जाता है और सिर पर हेलमेट पहनाया जाता है। इसके बाद, जुलूस में शामिल हुरियारे ‘लाट साहब’ पर जूते, चप्पल और झाड़ू बरसाते हुए पूरे शहर में घुमाते हैं।

यह जुलूस अंग्रेजों के शासन के प्रति आम जनता के गुस्से का प्रतीकात्मक प्रदर्शन है। शहर में दो जुलूस निकलते हैं- एक कोतवाली थाना क्षेत्र में ‘बड़े लाट साहब’ का और दूसरा रामचन्द्र मिशन थाना क्षेत्र में ‘छोटे लाट साहब’ का।

प्रशासन की मुस्तैदी और तैयारियां

जिला प्रशासन ने इस परंपरा के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं। बड़े और छोटे, दोनों लाट साहब के जुलूस के रूट पर पड़ने वाली लगभग 92 छोटी-बड़ी मस्जिदों को पॉलीपैक यानी तिरपाल से पूरी तरह कवर कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

जुलूस से लगभग 15 दिन पहले ही ‘लाट साहब’ बनने वाले व्यक्ति का चयन कर लिया जाता है और उसकी खूब खातिरदारी की जाती है। जुलूस के दिन उसे भैंसा गाड़ी पर बैठाकर पूरे शहर में घुमाया जाता है, जहां लोग रंग और जूतों की बौछार कर अपना गुस्सा जाहिर करते हैं। जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने तैयारियों की समीक्षा की है और अधिकारियों को समय पर सभी व्यवस्थाएं पूरी करने का निर्देश दिया है।

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