शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर उन्हें और उनके बटुकों को मरवा देने का गंभीर आरोप लगाया है। यह बयान तब आया है जब हाईकोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर एक महीने के लिए रोक लगा दी है। ब्रह्मचारी ने इस फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वे और उनके बटुक डरे हुए हैं और छिपकर घूम रहे हैं।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि हाईकोर्ट का यह आदेश एकतरफा है क्योंकि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हमें रात 10:30 बजे सूचना दी गई, हम कैसे कोर्ट चले जाते। हमारा जवाब दाखिल नहीं हुआ और यह एक पक्षीय आदेश है जो जारी कर दिया गया।”
‘हम इतने बड़े आदमी से नहीं लड़ सकते’
ब्रह्मचारी ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि वे एक बहुत शक्तिशाली व्यक्ति से लड़ रहे हैं जिनके पास हर तरह का समर्थन है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य के समर्थक ढोल बजा रहे हैं और उन्हें धमकियां दिलवा रहे हैं।
“अविमुक्तेश्वरानंद के पास वकील भी है, पैसा भी है और नेता भी हैं। वो हमें मरवा देगा। हम हाथ जोड़ते हैं। पॉक्सो एक्ट की धारा 19 में साफ-साफ लिखा है कि हमारा काम सूचना देने का है, अब आगे का काम पुलिस देखेगी और माननीय न्यायालय देखेगा। हम हाथ जोड़ते हैं हमें मत मरवाओ।” — आशुतोष ब्रह्मचारी
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके बटुकों को उठाने और छीनने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे सभी दहशत में हैं।
पुलिस और नेताओं पर भी गंभीर आरोप
आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दर्ज कराए गए एक झूठे मुकदमे में पुलिस ने तुरंत एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उन्होंने कहा, “हमारी गाड़ी पर हमला हुआ, बच्चों को उठाने का प्रयास हुआ… अभी तक पुलिस ने नक्शा तक नहीं बनाया है और कोई गिरफ्तारी तक नहीं की गई है।”
ब्रह्मचारी का यह भी दावा है कि उन्हें कई नेताओं की तरफ से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “बहुत सारे नेता सुबह से शाम तक धमकियां दिला रहे हैं। समाजवादी लोग उन्हें गाली दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि उनको उठा लो, फोन पर धमकियां आ रही हैं।” इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने कहा कि वे डर गए हैं और जितना लड़ना था, लड़ चुके हैं।






