
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों से संबंधित मुकदमों में आरोपितों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए 195 लोगों से 11,08,901 रुपये की वसूली के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह वसूली आदेश मेरठ के दावा न्यायाधिकरण ने जारी किया था।
मेरठ के दावा न्यायाधिकरण के वसूली आदेश के खिलाफ आरोपितों ने पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां उन्हें 50 प्रतिशत धनराशि 30 दिनों के भीतर जमा करने का आदेश दिया गया था। शेष राशि जमा करने का निर्णय मुकदमे के अंतिम फैसले पर निर्भर था। स्थानीय अधिवक्ता आमिर मियां ने बताया कि हाई कोर्ट के इस आदेश को 26 आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वसूली पर चार सप्ताह के लिए रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
रामपुर में हिंसक प्रदर्शन और मुकदमे
रामपुर में 21 दिसंबर 2019 को सीएए और एनआरसी के विरोध में शाहबाद गेट पर जलसा आयोजित हुआ था, जो हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। भीड़ ने हाथीखाना चौराहे पर पुलिस से मारपीट और पथराव किया, छह मोटरसाइकिलें और पुलिस की एक जीप फूंक दी गई। इस दौरान गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई थी और भीड़ ने पुलिस पर पेट्रोल बम भी फेंके थे। पुलिस ने गंज और शहर कोतवाली में हजारों लोगों के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला, लूट, हत्या, मारपीट और लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम जैसी धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे।
वसूली के लिए गठित दावा न्यायाधिकरण
पुलिस ने फोटो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारियां की थीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली के लिए उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली दावा अधिकरण का गठन किया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए यह अधिकरण मेरठ में स्थापित किया गया। मेरठ के दावा न्यायाधिकरण ने रामपुर के 195 लोगों को दोषी ठहराते हुए 11.08 लाख रुपये की वसूली का आदेश जारी किया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रूप से रोक दिया है।
