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धर्म, जाति और राजनीति की बहस के बीच अखिलेश बनाम अनिरुद्धाचार्य विवाद फिर गरमाया, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने साधा निशाना

Written by:Saurabh Singh
Published:
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बीच की पुरानी बहस एक बार फिर चर्चा में है।
धर्म, जाति और राजनीति की बहस के बीच अखिलेश बनाम अनिरुद्धाचार्य विवाद फिर गरमाया, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने साधा निशाना

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों धर्म, जाति और राजनीति के मुद्दों को लेकर बयानबाज़ी तेज़ है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के बीच की पुरानी बहस एक बार फिर चर्चा में है। इस बहस को लेकर जहां सपा की ओर से सांसद प्रिया सरोज ने तीखा पलटवार किया है, वहीं अब योगी सरकार के वरिष्ठ मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी खुलकर मैदान में आ गए हैं।

“छांगुर बाबा पर चुप्पी कमाल है”

प्रदेश के जलशक्ति मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने एक्स पर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए लिखा,

“जो साधु-संतों से पूछते सवाल हैं, उनकी छांगुर बाबा पर चुप्पी कमाल है!”

उनका इशारा धर्मांतरण के आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के मामले में समाजवादी पार्टी की चुप्पी की ओर था। छांगुर बाबा पर कथित तौर पर विदेशी फंडिंग से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराने के आरोप हैं। मंत्री ने अखिलेश पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी अप्रत्यक्ष रूप से लगाया।

अखिलेश-अनिरुद्धाचार्य वायरल वीडियो

हाल ही में अखिलेश यादव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की एक पुरानी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हुई है। यह वीडियो लोकसभा चुनाव 2023 से पहले का है, जब सड़क पर दोनों के बीच वर्ण व्यवस्था को लेकर बहस हुई थी। अखिलेश यादव ने कथावाचक से सवाल किया था कि “किसी को शूद्र कहने का क्या अर्थ होता है?” इस पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा था कि “नेता अगर कहें कि तुम्हारा रास्ता अलग और हमारा अलग, तो फिर देश का कल्याण कैसे होगा?”

जब बाबा कृष्ण का नाम नहीं बता पाता…

कथावाचक के जवाब और वायरल वीडियो को लेकर सपा सांसद प्रिया सरोज ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा,

“जब एक बाबा कृष्ण जी का नाम बताने में असफल हो जाता है, तो अपनी छवि सुधारने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का नाम हिंदू-मुस्लिम जोड़कर देश-प्रदेश का माहौल खराब करता है। यही प्रवचन देते हैं ये?”

प्रिया सरोज ने कथावाचक पर न केवल धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया, बल्कि उनकी प्रवचन शैली पर भी सवाल उठाए।

बात कहां से शुरू हुई थी?

यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ था जब अनिरुद्धाचार्य ने अपने प्रवचन में वर्ण व्यवस्था का समर्थन किया और समाज को चार वर्गों में बांटने की बात कही। उसी दौरान अखिलेश यादव ने बीच सड़क पर कथावाचक से सवाल किया और अंत में कहा, “अब हमारा और आपका रास्ता अलग है।” इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यूपी की राजनीति में धर्म और जाति आधारित ध्रुवीकरण की बहस को हवा दे दी है। भाजपा नेता जहां साधु-संतों का पक्ष लेकर सपा पर हमला बोल रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी इसे भाजपा की साजिश और मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति बता रही है।

Saurabh Singh
लेखक के बारे में
राजनीति में गहरी रुचि. खबरों के विश्लेषण में तेज और राजनीतिक परिस्थितियों की समझ रखते हैं. देश-दुनिया की घटनाओं पर बारीक नजर और फिर उसे खबरों के रूप में लिखने के शौकीन हैं. View all posts by Saurabh Singh
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