अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में दुनिया को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान किया है। बता दें कि उन्होंने साफ कहा है कि पाकिस्तान की अपील के बाद ही उन्होंने ईरान पर हमला करने की अपनी योजना टाल दी। अब इस अस्थायी विराम के बाद 10 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होगी। वहीं इस वार्ता में ईरानी संसद के स्पीकर और अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस जैसे उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि शामिल होंगे।
दरअसल इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर भारत में विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। बता दें कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बीजेपी सरकार की विदेश नीति पर सीधा निशाना साध रहे हैं। कानपुर में अखिलेश यादव ने कहा है कि, “भारतीय जनता पार्टी ने हमारी विदेश नीति चौपट कर दी है। एक समय लग रहा था कि भारत विश्वगुरु बनेगा, लेकिन अब दिख रहा है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संबंध मजबूत कर रहा है। वहीं भारत विदेश नीति में कमजोर दिखाई दे रहा है।” उनके इस बयान से भारत की वैश्विक भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भारत ने मौका खो दिया: अखिलेश यादव
वहीं अखिलेश यादव आगे कहते हैं कि भारत ने विश्वगुरु बनने का मौका गंवा दिया है। उन्होंने कहा, “जो विश्वगुरु बनने का सपना है, भारत ने वह मौका खो दिया। अगर इस युद्ध को रोकने में भारत सफल होता तो आज दुनिया में भारत को विश्वगुरु माना जाता।” उनका इशारा इस बात की ओर है कि जब दुनिया दो बड़ी शक्तियों के बीच युद्ध के खतरे में है, तब भारत को मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पाकिस्तान जैसे देश इस भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।
शर्तों पर दो हफ्तों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलेंगे
दरअसल महायुद्ध के 40वें दिन सीजफायर की घोषणा हुई है, जो दो हफ्तों तक प्रभावी रहेगा। इस घोषणा के बाद दोनों देश इसे अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं, वहीं ईरान भी इसे अपनी शर्तों पर मिली सफलता बता रहा है। सीजफायर के बाद ईरान में जश्न का माहौल है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वे अपनी शर्तों पर दो हफ्तों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलेंगे। यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बहुत अहम है क्योंकि यह दुनिया की सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक राहों में से एक है।
भविष्य में तनाव फिर बढ़ सकता है
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चेतावनी भी दे रहे हैं कि अगर यह समझौता नहीं चला तो युद्ध फिर शुरू हो सकता है। वहीं ईरान ने साफ़ किया है कि सीजफायर का मतलब जंग खत्म होना नहीं है, बल्कि यह केवल अस्थायी विराम है। दोनों पक्षों के इन बयानों से साफ है कि फिलहाल युद्ध रुका है, लेकिन भविष्य में तनाव फिर बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि इस अस्थायी शांति के बाद स्थायी समाधान निकल सकता है।
दरअसल इस समझौते को लेकर ट्रंप एक बड़ा दावा भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए तैयार किया। इसके बाद पाकिस्तान की अपील और मध्यस्थता से यह सीजफायर संभव हुआ है। ट्रंप के इस बयान से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका सामने आती है, जिसने युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई है।






