लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को अद्यतन करने का अभियान अंतिम चरण में है, लेकिन कई जिलों में धीमी गति चिंता का विषय बनी हुई है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने मेरठ में समीक्षा बैठक के दौरान इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 16 करोड़ मतदाता होने चाहिए, जबकि अभी यह संख्या 12.55 करोड़ है। इस अंतर को पाटने के लिए लगभग तीन करोड़ नए मतदाताओं को सूची में जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए अब तक 78 लाख फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन अधिकारियों को इस दिशा में और तेजी से काम करने की जरूरत है।
मेरठ में धीमी गति, बीएलओ को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
समीक्षा में यह बात सामने आई कि प्रदेश में जहां एसआईआर (Summary Information Report) के नोटिसों की सुनवाई का काम 73 प्रतिशत पूरा हो चुका है, वहीं मेरठ में यह आंकड़ा केवल 61 प्रतिशत है। इस धीमी गति के कारणों की जांच की जा रही है।
“मेरठ में नोटिसों की सुनवाई की गति धीमी जरूर है, लेकिन 26 मार्च 2026 से पहले ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।”- नवदीप रिणवा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश
सीईओ ने स्पष्ट किया कि कार्य में तेजी लाने और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बीएलओ द्वारा फॉर्म-6 भरने में कोई आनाकानी न हो, जैसी शिकायतें कुछ राजनीतिक दलों ने की थीं। आनाकानी करने वाले बीएलओ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
15 दिन में वोटर कार्ड और ऑनलाइन आवेदन पर जोर
नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल होने के 15 दिनों के भीतर मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरें, ताकि प्रक्रिया तेज हो और बीएलओ का काम भी आसान हो। उन्होंने यह भी कहा कि बीएलओ को फॉर्म भरते समय मतदाता का नाम, पता और फोटो सही-सही अंकित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी को परेशानी न हो।
शिकायत निस्तारण में यूपी देश में अव्वल
कुछ क्षेत्रों में धीमी गति के बावजूद, समग्र प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश कई मामलों में आगे है। सीईओ ने बताया कि एसआईआर संबंधी शिकायतों के निस्तारण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं, ‘बुक ए काल विद बीएलओ’ सुविधा के उपयोग में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि यहां कॉल रिक्वेस्ट की संख्या छह लाख से भी ज्यादा है। पहले स्थान पर मिजोरम है जहां यह संख्या नाममात्र की है। समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. वी के सिंह और एडीएम प्रशासन सत्यप्रकाश सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






