उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने शुक्रवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। इस लिस्ट में 2 करोड़ 6 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। वहीं, 84 लाख से अधिक नए मतदाताओं के नाम जोड़े भी गए हैं। सूची जारी होते ही समाजवादी पार्टी ने इस पर सवाल खड़े कर दिए। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने तो सीधे चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलकर काम करने और फर्जी दस्तखत से सपा के वोट कटवाने का आरोप लगाया है।
समाजवादी पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा है। इसमें साफ कहा गया है कि चुनाव आयोग 403 विधानसभा क्षेत्रों की 1 लाख 77 हजार 516 पोलिंग बूथों की मतदाता सूची में लॉजिकल एरर और नो-मैपिंग के आधार पर काटे गए नामों की पूरी जानकारी दे। इसके साथ ही, मृतक, शिफ्ट हुए, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची भी मांगी गई है। सपा ने फॉर्म-6 से जोड़े गए और फॉर्म-8 से संशोधित किए गए नामों की भी बूथवार और विधानसभावार सूची तत्काल सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराने की मांग की है। यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि सपा का सीधा आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी सुनियोजित तरीके से की गई है।
अखिलेश यादव का यूपी वोटर लिस्ट पर तीखा हमला
सपा के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने जयपुर दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए यूपी की नई वोटर लिस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, सभी को पता है कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आयोग के कर्मचारियों ने किस तरह से काम किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी के आदेश पर ही एसआईआर के नाम पर फर्जी दस्तखत कर समाजवादी पार्टी के वोट कटवाए गए हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है, यह सीधे तौर पर चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाना है।
अखिलेश यादव ने पिछले उपचुनावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उपचुनावों में वोटों की लूट और डकैती हुई थी। इन आरोपों के बावजूद उन्होंने दावा किया कि जैसे लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराया गया, वैसे ही 2027 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को हार मिलेगी। अखिलेश का यह बयान साफ करता है कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को आगामी चुनावों में एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने वाली है। मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना, और उस पर विपक्षी दल का फर्जीवाड़े का आरोप लगाना, आने वाले समय में राजनीतिक गरमाहट बढ़ाएगा।
एसआईआर प्रक्रिया में 84.28 लाख नए मतदाता जुड़े
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश में कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 वोटर हैं। इस अभियान में 84,28,767 मतदाता बढ़े हैं, लेकिन साथ ही 2024 के मुकाबले 2 करोड़ 6 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कट भी गए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटना, सीधे तौर पर चुनावी नतीजों पर असर डाल सकता है। खासकर तब, जब एक प्रमुख विपक्षी दल इसे फर्जीवाड़े से जोड़ रहा हो।
166 दिन चला मतदाता सूची का अभियान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची का अभियान कुल 166 दिन चला। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रयागराज, लखनऊ और जौनपुर जैसे जिलों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि कुछ जिलों में जहां नए नाम जोड़े गए, वहीं पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में नाम काटे भी गए हैं। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि नाम काटने की यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और इसमें राजनीतिक दबाव काम कर रहा था।
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना होता है, ताकि मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें और नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जा सके। लेकिन जब इस प्रक्रिया पर ही फर्जी दस्तखत जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह चुनाव आयोग की साख और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। अखिलेश यादव का यह बयान कि बीजेपी चुनाव आयोग से मिलकर चुनाव लड़ती है, एक बड़ा राजनीतिक हमला है जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ सकता है। सपा के इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग का जवाब और आगे की कार्रवाई क्या होती है, यह देखने वाली बात होगी।






