लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया है। सपा का दावा है कि फर्जी फॉर्म-7 भरकर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियों के लिए अंतिम तिथि को 6 मार्च तक बढ़ा दिया। विपक्ष का आरोप है कि यह विस्तार बीजेपी को और अधिक वोट कटवाने का मौका देने के लिए किया गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।
सपा का आरोप: हर विधानसभा में 15 हजार वोट काटने का टारगेट
समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि बीजेपी ने हर विधानसभा क्षेत्र में 7,000 से 15,000 वोट कटवाने का एक आंतरिक लक्ष्य निर्धारित किया है। 3 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने मीडिया के सामने कुछ विधानसभा क्षेत्रों से बरामद किए गए कथित नकली फॉर्म-7 पेश किए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया।
“यह वोट कटवाने की एक बड़ी साजिश है जिसमें चुनाव आयोग भी बीजेपी से मिला हुआ है। खास तौर पर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।”- अखिलेश यादव, सपा प्रमुख
सपा ने जौनपुर, सुल्तानपुर, मेरठ, कन्नौज और लखनऊ जैसे कई जिलों का हवाला देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति द्वारा दर्जनों फॉर्म-7 जमा किए गए हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
जमीनी हकीकत: कई जिलों से सामने आए गड़बड़ी के मामले
विपक्ष के आरोपों को कई जिलों से सामने आ रही घटनाओं से बल मिला है।
सुल्तानपुर: यहां एक ही मुस्लिम परिवार के 172 वोट काटने के लिए फॉर्म-7 भरे जाने का मामला सामने आया। एक अन्य मामले में, नंदलाल नाम के एक व्यक्ति के नाम से दर्जन भर फॉर्म जमा किए गए, जबकि नंदलाल निरक्षर हैं और अंगूठा लगाते हैं, लेकिन फॉर्म पर फर्जी हस्ताक्षर थे।
लखनऊ: राजधानी की सरोजिनी नगर विधानसभा में दशरथ नामक एक व्यक्ति के नाम से 100 से अधिक फॉर्म-7 जमा हुए, लेकिन जांच में इस नाम का कोई व्यक्ति पते पर नहीं मिला।
जौनपुर: यहां एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने मीडिया को बताया कि बीजेपी के बूथ अध्यक्ष ने उन्हें 17 फॉर्म देकर वोट काटने के लिए कहा था।
कन्नौज: एक स्थानीय बीजेपी नेता पर फॉर्म जमा करवाने का आरोप लगा, लेकिन मामला सामने आने पर वह मुकर गए और कहा कि किसी ने उनके नाम का दुरुपयोग किया है।
बीजेपी और चुनाव आयोग का पलटवार
इन गंभीर आरोपों के जवाब में बीजेपी और चुनाव आयोग दोनों ने अपना पक्ष रखा है। बीजेपी ने सपा के आरोपों को संभावित हार की बौखलाहट बताया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण चुनाव आयोग का एक नियमित कार्य है और उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अवैध मतदाता सूची में न रहे और कोई भी वैध मतदाता छूट न जाए।
वहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने 6 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि किसी का भी वोट मनमाने ढंग से नहीं काटा जा सकता है। उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 केवल उसी बूथ के मतदाता द्वारा ही भरा जा सकता है और इसमें शिकायतकर्ता का नाम, पूरा पता, EPIC नंबर और मोबाइल नंबर अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति एक से अधिक फॉर्म-7 जमा नहीं कर सकता। अधूरी जानकारी वाले फॉर्म स्वतः अमान्य हो जाएंगे।” आयोग ने मीडिया में सामने आए सभी मामलों में संबंधित जिलाधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं।
आंकड़ों में पुनरीक्षण प्रक्रिया
चुनाव आयोग द्वारा 4 फरवरी तक जारी आंकड़ों के अनुसार:
- ड्राफ्ट सूची में कुल मतदाता: 12,55,56,025
- नाम जोड़ने हेतु कुल फॉर्म-6: 54,37,850
- नाम हटाने हेतु कुल फॉर्म-7: 1,33,650
- नागरिकों द्वारा जमा फॉर्म-7 (ड्राफ्ट जारी होने के बाद): 82,684
- राजनीतिक दलों के एजेंटों (BLAs) द्वारा जमा फॉर्म-7: 1,567
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि नाम हटाने के लिए जमा किए गए अधिकांश फॉर्म आम नागरिकों द्वारा भरे गए हैं, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा संगठित तरीके से किया जा रहा है। फिलहाल, जांच जारी है और यह विवाद लोकसभा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।





