नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के बाद अब दूसरे चरण के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। इसके तहत स्टेज-2 फेज-2 और स्टेज-2 फेज-3 के लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी। दरअसल सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट के विस्तार से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। वहीं बैठक में जिलाधिकारी मेधा रुपम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित किसानों को समय पर उचित मुआवजा दिया जाएगा और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

दरअसल किसानों की सुविधा के लिए तीन अप्रैल से संबंधित गांवों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में किसान भूमि अधिग्रहण से जुड़े फॉर्म ले सकेंगे, जरूरी दस्तावेज जमा कर सकेंगे और मुआवजे से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर पाएंगे। इससे किसानों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

निगरानी के लिए तहसीलदार जेवर को कैंपों का प्रभारी बनाया गया

प्रशासन ने हर गांव में व्यवस्था संभालने के लिए राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और अमीन की टीम तैनात की है। राजस्व निरीक्षक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, लेखपाल जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेंगे और अमीन जमीन की माप व चिन्हांकन का काम देखेंगे। यह टीम किसानों की मदद भी करेगी और उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तहसीलदार जेवर को कैंपों का प्रभारी बनाया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे नायब तहसीलदार के साथ रोज गांवों का दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि कैंप सही तरीके से चल रहे हों और किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो।

ये गांव है शामिल

तीन अप्रैल को जिन गांवों में कैंप लगाए जाएंगे, उनमें थोरा गांव का प्राथमिक विद्यालय-1, नीमका शाहजहांपुर, ख्वाजपुर, रामनेर, किशोरपुर, बनवारीबांस, पारोही और रोही के डॉ. अंबेडकर भवन पारोही शामिल हैं। इसके अलावा मुकीमपुर शिवारा, जेवर बांगर, साबोता मुस्तफाबाद के पंचायत भवन, दयानतपुर के सर्व हितकारी इंटर कॉलेज, अहमदपुर चौरोली के पंचायत भवन और बंकापुर के डॉ. अंबेडकर भवन में भी कैंप आयोजित होंगे।

जिलाधिकारी मेधा रुपम ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे अपने गांव में लगने वाले कैंप में पहुंचकर मुआवजे से जुड़ी सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी करें। प्रशासन का कहना है कि इससे किसानों को जल्दी भुगतान मिल सकेगा और पूरी प्रक्रिया भी तेजी से पूरी हो सकेगी।