उत्तराखंड में कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार 16 फरवरी को देहरादून के परेड मैदान से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन राजभवन की ओर कूच में तब्दील हो गया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में प्रदेशभर से आए हजारों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
कांग्रेस का मुख्य निशाना बिगड़ती कानून व्यवस्था और 15 दिनों में हुई पांच हत्याओं पर था। पार्टी ने महिला अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, जंगली जानवरों के हमले, पलायन, आपदा प्रभावितों को राहत, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा न मिलने जैसे मुद्दों को उठाया।
लोकभवन तक पहुंचने में संघर्ष
प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए चार स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी। लोकभवन की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता दो बैरिकेडिंग पार करने में सफल रहे, जिससे कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण बन गई।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मेहनत करनी पड़ी। सुरक्षाबलों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सख्त प्रबंध किए थे।
नेताओं ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने परेड मैदान में एकत्रित हुए कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने सरकार पर कानून व्यवस्था संभालने में विफल रहने, महंगाई पर नियंत्रण न कर पाने और भ्रष्टाचार के मामलों में ढिलाई बरतने के गंभीर आरोप लगाए।
पार्टी नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि राज्य में कानून-व्यवस्था पटरी पर नहीं आई और अपराधों पर लगाम नहीं लगी तो कांग्रेस उग्र आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
चुनावी रणनीति का हिस्सा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रदर्शन आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी जनता के मुद्दों को जोर-शोर से उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया। अब यह देखना होगा कि इस शक्ति प्रदर्शन का चुनावी समीकरणों और राज्य की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।





