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उत्तराखंड में सघन सत्यापन अभियान शुरू, अब बिना पुलिस वेरिफिकेशन किरायेदारी पर होगी कड़ी कार्रवाई

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
उत्तराखंड पुलिस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार प्रदेश भर में संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए व्यापक सत्यापन अभियान शुरू किया है। DGP दीपम सेठ ने स्पष्ट किया कि बिना पुलिस सत्यापन के किरायेदारी देने पर कड़ी कार्रवाई होगी। अभियान में होटल, पीजी, फ्लैट, ई-कॉमर्स कर्मचारियों समेत सभी संदिग्धों की जांच की जाएगी।
उत्तराखंड में सघन सत्यापन अभियान शुरू, अब बिना पुलिस वेरिफिकेशन किरायेदारी पर होगी कड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य पुलिस ने एक विशाल सत्यापन अभियान की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद यह अभियान प्रदेश के सभी जनपदों में सर्किल, थाना और चौकी स्तर पर एक साथ संचालित किया जा रहा है।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी व्यक्ति बिना पुलिस सत्यापन कराए किरायेदारी कराएगा या संदिग्ध लोगों को आश्रय देगा, उसके खिलाफ विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

किन-किन स्थानों पर होगा सत्यापन

इस व्यापक अभियान के अंतर्गत मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट्स, आश्रम, धर्मशालाएं, किराये के मकान, फ्लैट, पीजी, होम-स्टे, होटल और गेस्ट हाउस में रहने वाले सभी व्यक्तियों का verification किया जाएगा। प्रॉपर्टी डीलर, रियल एस्टेट एजेंट और ब्रोकर का भी सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा तथा उनके माध्यम से हुए किरायेदारी अनुबंधों की विस्तृत जांच की जाएगी।

विशेष रूप से होम डिलीवरी सेवाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी एजेंटों, सिक्योरिटी एजेंसी स्टाफ, कैब संचालकों और इंडस्ट्रियल एरिया में काम करने वाले ठेकेदारों पर फोकस किया जाएगा। Amazon, Zomato, Blinkit जैसी विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्मिकों की पहचान एवं सत्यापन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है।

तकनीकी साधनों से होगी निगरानी

अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों और केंद्रीय डाटाबेस का भरपूर उपयोग किया जाएगा। National Intelligence Grid (NATGRID), CCTNS, ICJS सहित अन्य केंद्रीय और राज्य सुरक्षा पोर्टलों के माध्यम से सूचना मिलान और सटीक विश्लेषण किया जाएगा।

अवैध रूप से निवास कर रहे प्रवासियों, विशेष रूप से अवैध घुसपैठियों, बांग्लादेशी नागरिकों और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी ठहरे हुए विदेशी नागरिकों की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

CCTV कैमरों की भी होगी जांच

प्रदेश के समस्त रिहायशी क्षेत्रों, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सर्विस सेंटर, कोचिंग संस्थान, जिम, स्कूल, विश्वविद्यालय, ट्रांसपोर्ट एजेंसियों, ब्यूटी पार्लर और सैलून जैसे प्रतिष्ठानों में High Resolution सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता, उनकी कार्यशील स्थिति और रिकॉर्डिंग व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा।

इन स्थानों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों का चरित्र सत्यापन किया जाएगा और उन्हें आवश्यक सुरक्षा ब्रीफिंग भी दी जाएगी। क्षेत्रों में रहने वाले एकल नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों का चिन्हीकरण कर उनकी सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाएगा।

उनकी सेवा में लगे घरेलू सहायकों, केयर-टेकर, ड्राइवर और अन्य सहयोगी कार्मिकों का भी अनिवार्य सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

समन्वित कार्रवाई और जवाबदेही

अभियान के दौरान जनपदीय पुलिस, स्थानीय अभिसूचना इकाई, एसओजी और एसटीएफ द्वारा समन्वित रूप से कार्रवाई की जाएगी। प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण कर आवश्यकतानुसार अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।

प्रत्येक थाना स्तर पर विशेष फील्ड टीमों का गठन किया गया है। CO से लेकर IG रेंज स्तर तक समीक्षा व्यवस्था लागू की गई है ताकि अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस का यह व्यापक अभियान महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। पूरे अभियान की monitoring के साथ हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है और आपराधिक तत्वों के साथ सख्ती से निपटने का निर्देश दिया गया है।

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