भारत-पाकिस्तान मैच पर हरीश रावत का ‘मास्टरस्ट्रोक’! कहा- पूरा देश आक्रोशित है, अब एक कड़ा संदेश देने की जरूरत

भारत-पाकिस्तान मैच पर हरीश रावत का ‘मास्टरस्ट्रोक’! कहा- पूरा देश आक्रोशित है, अब एक कड़ा संदेश देने की जरूरत

क्रिकेट का मुकाबला सिर्फ खेल नहीं होता, कभी-कभी राजनीति, भावनाओं और रिश्तों का भी मामला बन जाता है। भारत और पाकिस्तान का मैच जैसे ही नजदीक आया, सियासी बयानों की बाढ़ आ गई। अब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मैच को लेकर ऐसा बयान दिया है कि लोग सुनकर चर्चा करने लगे हैं। चलिए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।

“पूरा भारत आक्रोशित है”

हरीश रावत ने कहा कि भारत की जनता पाकिस्तान को लेकर बहुत नाराज है। उन्होंने कहा कि खेल और खून साथ नहीं चल सकते। लोग इस बात से परेशान हैं कि पाकिस्तान रोज़ आतंकवाद फैलाता है और हमारी जमीन पर खून की होली खेलना चाहता है। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद रोक नहीं देता, तब तक उसके साथ कोई रिश्ता नहीं होना चाहिए।

कड़ा संदेश देना जरूरी

पूर्व सीएम ने कहा कि हमें दुनिया को कड़ा संदेश देना होगा। जो देश एक तरफ पाकिस्तान की सेना के साथ डिनर करते हैं और दूसरी तरफ खुद को भारत का दोस्त बताते हैं, उन्हें भी सोचना चाहिए। ऐसे देशों को समझाना होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद फैलाने वाला देश है। यह संदेश वहां की जनता तक भी पहुँचना चाहिए ताकि वे असलियत जानें।

शंघाई सहयोग संगठन पर सवाल

हरीश रावत ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई समूह का सह-अध्यक्ष बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो देश हमारी तस्वीरें साथ खिंचवाते हैं, वही देश आतंकवाद फैलाने वाले पाकिस्तान का साथ क्यों देते हैं? उन्होंने कहा कि भारत को अपने दोस्तों को भी समझाना चाहिए कि आतंकवाद के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती की मांग

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है और उससे रिश्ते रखने का कोई मतलब नहीं। जब तक आतंकवाद पर रोक नहीं लगेगी, तब तक भारत को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने जनता से भी कहा कि हमें अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए। भारत को खेल से ज्यादा अपने राष्ट्र की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

खेल से परे रिश्तों पर ध्यान

हरीश रावत ने कहा कि क्रिकेट खेल है, लेकिन रिश्ते खेल नहीं होते। उन्होंने प्रधानमंत्री की बात का समर्थन करते हुए कहा कि खून, खेल, कूटनीति और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते। यह बयान खेल से आगे बढ़कर राष्ट्र की सुरक्षा और स्वाभिमान की बात करता है। भारत को अपने सिद्धांतों पर खड़ा रहना चाहिए और आतंकवाद से समझौता नहीं करना चाहिए।

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