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नैनीताल चुनाव में अपहरण-हंगामे का मामला तूल पकड़ गया, आयोग ने डीएम, एसएसपी और प्रत्याशियों को नोटिस जारी किया

Written by:Vijay Choudhary
Published:
नैनीताल चुनाव में अपहरण-हंगामे का मामला तूल पकड़ गया, आयोग ने डीएम, एसएसपी और प्रत्याशियों को नोटिस जारी किया

Nainital Zila Panchayat

नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मतदान के दिन पांच सदस्यों के गायब होने की घटना से चुनाव शंकास्पद हो गया। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इस पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है। चुनाव के दौरान अचानक पांच जिला-पंचायत सदस्य लापता हो गए, जिसके बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें अपहरण कर वोटिंग से रोकने की कोशिश की गई। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई और आयोग ने तुरंत जवाब देने को कहा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने डीएम, एसएसपी, दोनों प्रत्याशियों (दीपा दर्मवाल व पुष्पा नेगी), याचिकाकर्ता पूनम बिष्ट, और गायब सदस्यों को नोटिस जारी किया है। इन सभी को 5 सितंबर को आयोग के सामने पेश होने का निर्देश मिला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत से रिपोर्ट त्वरित रूप से प्रस्तुत करने को कहा है। उच्च न्यायालय ने इस पूरे चुनावी दंगल में पुलिस की लचर जवाबदेही पर सख्त टिप्पणी की। SSP PN Meena की ना सिर्फ आलोचना हुई, बल्कि उन्हें स्थानांतरित करने की सिफारिश भी की गई है।

परिणाम भी रुका हुआ

चुनाव परिणाम को सील कर दिया गया है और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने तक इसे घोषित नहीं किया जाएगा। चुनाव के दिन मतदान स्थल पर बवाल और हथियारों की धमकियां भी सामने आई थीं। इस दौरान वोट की गिनती देर रात हुई, और ड्रोन व पैदल गश्त के जरिए सुरक्षा व्यवस्था सख्त की गई थी। इस रंगदारी और अपहरण की खबर पर 11 लोगों, जिनमें भाजपा जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं, के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित तक किया गया।

हाई-कोर्ट का रुख

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि यह नैनीताल एक सामान्य शहर नहीं, बल्कि हाई-कोर्ट का इलाके में है—यहां ऐसी घटना लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाती है।नैनीताल का ज़िला पंचायत चुनाव अब केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा—यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठते सवालों का भी विषय बन चुका है। न्यायालय, चुनाव आयोग और सरकार द्वारा मिलकर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। अब चुनाव का परिणाम वही रहेगा, जो न्यायालय और आयोग तय करेंगे।