
उत्तराखंड में इस साल मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जाएगा। इसके तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान होगा। यदि किसी का नाम उस सूची में दर्ज नहीं होगा, तो उन्हें आवश्यक दस्तावेज देने होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने तैयारी शुरू कर दी है और गुरुवार को टेबल टॉप एक्सरसाइज भी की गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में सचिवालय में राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर विस्तृत जानकारी साझा की गई।
श्रेणियों के हिसाब से होगा दस्तावेज सत्यापन
मतदाताओं को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-ए के अंतर्गत वे मतदाता आएंगे जिनकी आयु 38 वर्ष से ऊपर है और उनका नाम 2003 की सूची में दर्ज है, तो केवल एब्सट्रेक्ट देना होगा। श्रेणी-बी में वे लोग शामिल होंगे जिनकी उम्र 38 वर्ष या अधिक है, पर 2003 की सूची में नाम नहीं है। ऐसे लोगों को पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे 11 दस्तावेजों में से कोई एक देना होगा। श्रेणी-सी में 20-37 वर्ष के और श्रेणी-डी में 18-19 वर्ष के युवाओं को अपने और माता-पिता का कोई दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।
2003 की सूची जारी, मतदाताओं को देखना होगा नाम
निर्वाचन कार्यालय ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची जारी कर दी है। सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं को इसमें अपना नाम खोजना होगा। यदि किसी मतदाता को आयोग के निर्णय पर आपत्ति है तो वह 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपील कर सकता है। यदि फिर भी संतोषजनक समाधान नहीं मिला, तो वह 30 दिन के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास दूसरी अपील दायर कर सकेगा। इस प्रक्रिया का मकसद है कि राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बने।
11,733 बूथ, राजनीतिक दलों को बीएलए नियुक्त करने की अपील
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम ने बैठक में बताया कि प्रदेश में 11,733 मतदान बूथ हैं। इनमें प्रत्येक राजनीतिक दल को एक-एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करना होगा। अभी तक केवल 2,744 बीएलए ही नियुक्त हुए हैं। उन्होंने सभी दलों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द बीएलए नियुक्त करें ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया सुचारु ढंग से पूरी की जा सके। बैठक में कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी और सीपीआई (एम) के प्रतिनिधि मौजूद रहे और आयोग की ओर से दिशा-निर्देशों पर चर्चा की गई।
