
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला तूल पकड़ चुका है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस ने इस घोटाले के विरोध में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी कार्यकर्ता सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देंगे और सरकार व आयोग का पुतला दहन करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने तक जारी रहेगा। इस कदम से राज्य की राजनीति में पेपर लीक प्रकरण को लेकर हलचल तेज हो गई है।
बेरोजगारों के साथ धोखा: कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने पेपर लीक प्रकरण को बेरोजगारों के साथ धोखा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के निर्देश पर 22 सितंबर को पूरे प्रदेश में प्रदर्शन होगा। धस्माना ने सवाल उठाया कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को दिए गए प्रश्न पत्र के तीन पन्ने बाहर कैसे पहुंचे और वायरल कैसे हुए। सोशल मीडिया पर वायरल इन पन्नों की परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने मिलान किया तो वही प्रश्न पाए गए। धस्माना का कहना है कि जिस सरकार ने खुद को सख्त नकलरोधी कानून बनाने का श्रेय दिया, वही अब इस मामले में जवाब देने से बच रही है।
सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस, आयोग पर भी निशाना
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह अब इस मुद्दे पर सड़कों पर उतरकर सरकार और आयोग दोनों को घेरने का काम करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि पेपर लीक से राज्य की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। बेरोजगार युवाओं के साथ मजाक करना प्रदेश के भविष्य से खिलवाड़ करने जैसा है। कांग्रेस कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन के जरिए बेरोजगार युवाओं की आवाज बुलंद करेंगे। पार्टी ने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदारों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। इसके अलावा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी पुनर्विचार किया जाए।
पेपर लीक पर अन्य दलों का भी हमला
पेपर लीक मामले पर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दल भी हमलावर हैं। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय ने कहा कि पेपर लीक बेरोजगारों के साथ सरासर धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार ऐसे घोटालों को बढ़ावा देकर राज्य को भ्रष्टाचार का गढ़ बना रहे हैं। उपाध्याय ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार समय रहते इस घोटाले को नहीं रोक पाई तो यह युवाओं के विश्वास को पूरी तरह से तोड़ देगा और शासन-प्रशासन की साख पर भी गहरा धब्बा लगेगा।
