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उत्तराखंड कैबिनेट: वायु सेना को मिलेंगी चिन्यालीसौड़-गौचर हवाई पट्टियां, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और नए भूमि कानून को मंजूरी

Written by:Banshika Sharma
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उत्तराखंड कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए हैं। इनमें उत्तरकाशी और चमोली की हवाई पट्टियों को वायु सेना को सौंपना, राज्य की ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी देना और परियोजनाओं के लिए आपसी सहमति से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय करना शामिल है। साथ ही, औद्योगिक इस्तेमाल के लिए भू-जल निकासी पर अब शुल्क लगेगा।
उत्तराखंड कैबिनेट: वायु सेना को मिलेंगी चिन्यालीसौड़-गौचर हवाई पट्टियां, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और नए भूमि कानून को मंजूरी

Uttarakhand cabinet meeting

देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने राज्य के विकास और सामरिक महत्व से जुड़े कई बड़े फैसलों पर अपनी मुहर लगा दी है। इनमें सबसे प्रमुख चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को भारतीय वायु सेना को सौंपना, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026’ को मंजूरी देना और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण फैसला

कैबिनेट ने सामरिक महत्व को देखते हुए उत्तरकाशी जिले की चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी और चमोली की गौचर हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना को सौंपने पर सहमति दी है। इन हवाई पट्टियों को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में विकसित किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच बनी सहमति के आधार पर इन्हें नागरिक और सैन्य संचालन के लिए संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। यह निर्णय सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य और नागरिक उड्डयन को मजबूती देगा।

उद्योग, पर्यावरण और निवेश को बढ़ावा

राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026’ को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य को कार्बन उत्सर्जन मुक्त बनाने, जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक होगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, सरकार ने गैर-कृषि कार्यों के लिए भू-जल के इस्तेमाल पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसके तहत औद्योगिक इकाइयों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, होटलों और वाटर पार्कों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भू-जल निकासी के लिए निर्धारित दर पर शुल्क देना होगा। इसके लिए 5000 रुपये का पंजीकरण शुल्क भी तय किया गया है। इसका उद्देश्य भू-जल के अनियंत्रित दोहन को रोकना है।

भूमि अधिग्रहण और औद्योगिक विकास की राह आसान

कैबिनेट ने परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक नई व्यवस्था को मंजूरी दी है। अब आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से सीधे भूमि खरीदी जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे भूमि अधिग्रहण में लगने वाला समय कम होगा, मुकदमेबाजी घटेगी और जनहित की परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।

इसके अलावा, उधमसिंह नगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि पर औद्योगिक विकास का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। कैबिनेट ने सिडकुल को हस्तांतरित इस भूमि को समान औद्योगिक प्रयोजन के लिए उप-पट्टे (Sub-lease) पर देने के अधिकार को मंजूरी दे दी है, जिससे औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में तेजी आएगी।

शिक्षा और कर्मचारी हित में निर्णय

राज्य को शिक्षा हब बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए देहरादून में ‘जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय’ नाम से एक निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को स्वीकृति दी गई है।

कर्मचारियों के हित में फैसला लेते हुए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को सेवाकाल में एक बार आपसी सहमति के आधार पर जिला बदलने की अनुमति दी गई है। इसके लिए न्यूनतम 5 वर्ष की संतोषजनक सेवा अनिवार्य होगी। साथ ही, जनजाति कल्याण विभाग के ढांचे को पुनर्गठित करते हुए देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।