उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन, हर महीने चलेगा विशेष जांच अभियान, दोषियों पर कार्रवाई में आएगी तेजी

उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब हर महीने एक सप्ताह तक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा और विभाग में स्टाफ की कमी भी दूर होगी।
उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन, हर महीने चलेगा विशेष जांच अभियान, दोषियों पर कार्रवाई में आएगी तेजी

देहरादून: उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब सरकार ने और भी सख्त रुख अपना लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब केवल त्योहारों के दौरान ही नहीं, बल्कि हर महीने एक सप्ताह का विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन में दी गई। सरकार ने साफ किया कि खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है और इसे और प्रभावी बनाया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

हर महीने होगी सघन जांच

सरकार की नई योजना के तहत, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अब हर महीने एक सप्ताह तक प्रदेशभर में औचक निरीक्षण और सैंपलिंग करेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि विशेष रूप से हाट-बाजारों और मेलों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर खास नजर रखी जाएगी, क्योंकि यहां मिलावट की आशंका अधिक रहती है।

“जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा।”- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

इसके अलावा, जांच अभियानों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए विभाग में स्टाफ की कमी को भी दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जांच का दायरा बढ़ेगा और दोषियों पर कार्रवाई में तेजी आएगी।

कार्रवाई के आंकड़े

सरकार ने पिछले दो वर्षों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए, जो मिलावट के खिलाफ चल रही कार्रवाई को दर्शाते हैं।

वर्ष 2023-24: विभाग ने कुल 1,627 नमूने एकत्र किए, जिनमें से 171 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन सभी मामलों में 171 वाद पंजीकृत कराए गए।

वर्ष 2024-25: इस अवधि में 1,684 नमूने लिए गए, जिनमें से 159 सैंपल फेल पाए गए। इन मामलों के आधार पर 159 वाद दायर किए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि जांच प्रक्रिया लगातार चल रही है और नई नीति से इसमें और भी तेजी आएगी।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
Shyam Dwivedi

7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
Follow Us :GoogleNews