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उत्तराखंड की नीतियों में अब रिसर्च और डेटा पर ज्यादा फोकस, CM धामी बोले- योजनाओं का हर साल हो मूल्यांकन

USCPPGG की शासी निकाय की बैठक में विकसित उत्तराखंड-2047 की रणनीति पर मंथन, नीतियों में रिसर्च और डेटा के इस्तेमाल के साथ योजनाओं की सालाना मॉनिटरिंग पर जोर; प्रमुख विश्वविद्यालयों के हर साल 10 PG विद्यार्थियों को कैपस्टोन प्रोजेक्ट के लिए स्टाइपेंड देने पर सहमति
Pushkar Singh Dhami

देहरादून: उत्तराखंड में भविष्य की नीतियां और योजनाएं तैयार करने में रिसर्च, डेटा और राज्य की वास्तविक जरूरतों को ज्यादा महत्व दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखंड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय की बैठक में कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतियों को ध्यान में रखकर किए गए शोध का असर सरकारी नीतियों में भी दिखाई देना चाहिए। योजनाओं के लक्ष्य तय करने के साथ उनकी हर साल मॉनिटरिंग और नियमित मूल्यांकन पर भी जोर दिया गया।

बैठक में विकसित उत्तराखंड-2047 की रणनीति पर चर्चा हुई। आर्थिक विकास और रोजगार से लेकर स्वास्थ्य, मानव संसाधन, वन एवं जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय निकाय और तकनीक आधारित सुशासन तक कई क्षेत्रों को भविष्य की योजना में शामिल करने की बात हुई। मुख्यमंत्री ने राज्य में अलग-अलग क्षेत्रों में हुए अच्छे कामों की केस स्टडी तैयार करने और जिला व ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की ट्रेनिंग पर भी फोकस करने के निर्देश दिए।

हर साल 10 PG छात्रों को रिसर्च के लिए मिलेगा स्टाइपेंड

बैठक में एक अहम फैसला राज्य के विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को लेकर हुआ। प्रमुख विश्वविद्यालयों के हर साल 10 स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को कैपस्टोन प्रोजेक्ट के लिए स्टाइपेंड देने पर सहमति बनी। इन विद्यार्थियों को उत्तराखंड की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर रिसर्च और प्रोजेक्ट के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग भी राज्य की जरूरत के मुताबिक ऐसे विषय चिह्नित करेंगे, जिन पर विश्वविद्यालयों के जरिए अध्ययन कराया जा सके।

शासी निकाय के सदस्यों ने उत्तराखंड में हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम उत्पादों और MSME पर ज्यादा ध्यान देने का सुझाव दिया। पहाड़ी क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके साथ मृदा और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्रमुख फोकस एरिया में रखने का सुझाव सामने आया।

योजनाएं जमीन पर कितना असर कर रहीं, इसकी भी होगी पड़ताल

बैठक में केवल नई नीतियां बनाने के बजाय पहले से चल रही योजनाओं के परिणामों को लगातार जांचने पर भी जोर दिया गया। सदस्यों ने वार्षिक लक्ष्य तय करने, नियमित मॉनिटरिंग करने और समय-समय पर नीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करने का सुझाव दिया। CM धामी ने उपयोगी सुझावों का परीक्षण कर उन पर आगे कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को लेकर USCPPGG और UNDP के सहयोग से चल रहे काम की भी समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों के क्षेत्र में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर है।

उत्तराखंड के 25 साल के सफर पर पुस्तक का विमोचन

इस दौरान मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का विमोचन किया। इसमें उत्तराखंड के 25 वर्षों के सफर को समेटा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आगे के विकास में आर्थिक प्रगति के साथ रोजगार, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास को भी साथ लेकर चलना होगा।

बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ शासी निकाय के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Shyam Dwivedi
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