उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, अब पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आस्था, रोमांच और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। सरकार की योजनाएं न केवल यात्रा को सुगम बना रही हैं, बल्कि पर्यटन को साल भर चलने वाली गतिविधि में भी बदल रही हैं।
राज्य का फोकस सिर्फ पारंपरिक तीर्थ यात्रा पर नहीं, बल्कि इसे आधुनिक सुविधाओं और नए अनुभवों के साथ जोड़ने पर है। इसी दिशा में कई बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
रोपवे से आसान होगी मुश्किल चढ़ाई
चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए रोपवे परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹4,081 करोड़ है। इसी तरह, हेमकुण्ड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे के निर्माण पर ₹2,730 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के पूरा होने से घंटों की यात्रा मिनटों में सिमट जाएगी, जिससे बुजुर्ग और बच्चे भी आसानी से दर्शन कर सकेंगे।
धार्मिक सर्किट और धामों का कायाकल्प
पर्यटन को सिर्फ कुछ प्रमुख केंद्रों तक सीमित न रखकर पूरे राज्य में फैलाने की योजना है। कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मानसखण्ड मंदिर माला मिशन शुरू किया गया है। इस मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को एक भव्य धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके साथ ही केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का काम तेजी से जारी है। बदरीनाथ धाम को ₹255 करोड़ की योजनाओं के साथ एक ‘स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार ने नए धार्मिक स्थलों जैसे हरिपुर कालसी में यमुना तीर्थ स्थल और हनोल में महासू मंदिर के विकास के लिए भी मास्टर प्लान को मंजूरी दी है।
एडवेंचर और स्पोर्ट्स टूरिज्म का नया अध्याय
उत्तराखंड अब सिर्फ एक तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि एडवेंचर टूरिज्म का एक बड़ा हब बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार ने पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को खोल दिया है, जो दुनिया भर के पर्वतारोहियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है।
हाल ही में आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 22 राज्यों के 700 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है। ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग और स्टार गैजिंग जैसी गतिविधियां पहले से ही लोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वेड इन उत्तराखंड’ की अपील के बाद राज्य एक प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर भी पहचान बना रहा है।





