सेवानिवृत्त शिक्षिका ने दिये 51 हजार, हरसोला वणिक समाज ने भी की सहायता

सेवानिवृत्त शिक्षिका ने दिये 51 हजार, हरसोला वणिक समाज ने भी की सहायता

अलीराजपुर/यतेंद्रसिंह सोलंकी

कोरोना वायरस की इस महामारी से निपटने हेतु हर कोई अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में अलीराजपुर की एक सेवानिवृत्त शिक्षिका ने मदद के हाथ आगे बढ़ा कर  मिसाल कायम की हैं। आमला लाइन निवासी सिन्धु कावले ने संकट की इस घड़ी में  कलेक्टर सुरभि गुप्ता को 51 हजार रुपये का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने के लिए सौंपा। उनके इस पुनीत सद्कार्य से प्रसन्न होकर जिलाधीश एवं नगर के सभी प्रबुद्ध वर्ग ने उनकी मुक्त कंठ से प्रसंशा करते हुए इसे एक अनुकरणीय उदाहरण बताया है।

वहीं हरसोला वणिक समाज ने भी पीएम सहायता कोष में 51 हजार रूपये दान किये हैं।शुक्रवार को हरसोला समाज के लोगों द्वारा कलेक्टर सुरभि गुप्ता को 51 हजार रुपये का चेक सौपा गया। हरसोला समाज के मीडिया प्रभारी गिरिराज मोदी ने बताया कि गुरुवार को हरसोला वणिक समाज आलीराजपुर द्वारा समाजजनों से सहयोग राशि एकत्रित कर प्रधानमंत्री सहायता कोष में जमा करने का निर्णय लिया ताकि जरूरतमन्द तक सहयोग पहुंच सके। समाज के अध्यक्ष भरत भाई मोदी,पूर्व अध्यक्ष राजू भाई मोदी, समाज के वरिष्ठ किशोर भाई शाह,कल्पेश सराफ द्वारा कोरोना संकट की घड़ी में समाज को ओर से राशि एकत्रित कर पीएम सहायता कोष में जमा करवाने की अपील की गई थी। जिसके बाद समाज के दान दाताओ द्वारा बढ़चढ़कर इस पुनीत कार्य मे सहयोग राशि की घोषणा कर मानवता का परिचय दिया गया।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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