बाहर निकलने वालों पर अब पुलिसिया गांधीगिरी और डंडा एक साथ, देखिये वीडियो

बाहर निकलने वालों पर अब पुलिसिया गांधीगिरी और डंडा एक साथ, देखिये वीडियो

अशोकनगर/अलीम डायर

एक तरफ प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक लोगों से अपील कर रहा है कि घर से बाहर न निकलें, बिना अत्यावश्यक कार्य के बाहर निकलकर अपनी और दूसरों की जान खतरे में न डालें, लेकिन लोग हैं कि उनपर कोई असर ही नहीं होता। कई लोग अब भी सड़कों पर बिना कारण यूं निकल रहे हैं जैसे तफरीह करने जा रहे हो। एक तरफ प्रशासन पर व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है दूसरी तरफ ऐसे लोगों से भी निपटना है। ऐसे में अब पुलिस गांधीगिरी और डंडे दोनों का उपयोग कर रही है।

अशोकनगर में पुलिस और प्रशासशन की टीम सड़कों पर गश्त लगा रही है और व्यर्थ घूमने वालों के साथ सख्ती से पेश आ रही है। इस दौरान कई ऐसे लोग जो बेवजह घर से बाहर निकले थे, मुंगावली थाना प्रभारी रोहित दुबे ने उनसे उठक-बैठक लगवाई ओर उनके मुंह से कहलवाया कि मैं समाज का दुश्मन हूं और मैं घर पर नही रहूंगा। इसी के साथ उन्हें लाठियों से हल्का सा धमकाया भी गया। पुलिस का कहना है कि कई बार समझाइश के बाद भी अगर लोग नहीं सुन रहे तो उन्हें कई न कोई दूसरा तरीका निकालना ही पड़ेगा।

बता दें कि कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के बावजूद शहर के लोग बाहर घूमने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। दोपहर तक निर्धारित समय के बाद भी 2 दिनों से सड़कों पर लोगों की आवाजाही बरकरार है। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सख्त रवैया अपना लिया है, सुबह से दोपहर तक पुलिस ने लोगों को सड़कों पर ना घूमने के लिए समझाइश दी लेकिन नियम ना मानने वाले लोगों को थाना प्रभारी रोहित दुबे ने बाद में अपने तरीके से समझाया। आखिरकार ये तरीका कारगर साबित हुआ और इसके बाद से सारे नगर में सन्नाटा पसरा रहा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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