Astrology: शिक्षा से होता है इस ग्रह का गहरा नाता, कमजोर होने पर नहीं लगता पढ़ाई में मन, आजमाएं ये 7 उपाय

astrology

Astrology: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह मनुष्य के जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें सुख और दुख दोनों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। सभी ग्रहों की अलग-अलग विशेषता होती है। ग्रह जीवन के विभिन्न पहलुओं से जुड़े होते हैं। शिक्षा और एकग्रता से भी ग्रहों का गहरा संबंध होता है। ग्रहों की स्थिति कमजोर होने से आपके करियर में भी रुकावट उत्पन्न हो सकती है।

इन ग्रहों के कमजोर होने से नहीं लगता पढ़ाई में मन

ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को शिक्षा, बुद्धि और एकाग्रता का कारक माना जाता है। कुंडली में इस ग्रह की स्थिति कमजोर होने से पढ़ाई में नहीं लगता है। बुद्धि भ्रष्ट होती है। छात्र पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। जिसके कारक शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों का विकास अच्छे से नहीं हो पाता। करियर में भी बाधा उत्पन्न होने लगती है। वहीं चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। इस ग्रह के कमजोर होने से व्यक्ति अपने मन पर काबू नहीं रख पाता। छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंतित होने लगता है।

आजमाएं ये उपाय

  • बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करें। दूर्वा अर्पित करें।
  • घर में तुलसी का पौधा लगाएं और रोज सुबह उठकर तुलसी की पत्तियों का सेवन करें ।
  • बुध को मजबूत करने के लिए पन्ना रत्न और चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सफेद मोती धारण करें।
  • बुधवार के लिए हरे रंग के वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद माथे, कंठ और साइन पर पीला चंदन लगाएं।
  • प्रतिदिन सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
  • रोजाना सुबह स्नान करके गायत्री मंत्र और “ॐ माँ सरस्वती विद्या देवी नमो नमः” मंत्र का जाप करें।
  • स्टडी टेबल के पास मोरपंख रखें। ऐसा करने से मन शांत रहता है।

(Disclaimer: इस आलेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है, जो ग्रंथों, मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। MP Breaking News इन बातों के सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं करता।)

Manisha Kumari Pandey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है। अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →
Follow Us :GoogleNews