लॉक डाऊन में पेट की भूख ने बनाया चोर, पुलिस ने धरा

लॉक डाऊन में पेट की भूख ने बनाया चोर, पुलिस ने धरा

बैतूल| वाजिद खान| लॉक डाऊन के दौरान इंसान को पेट की भूख चोर भी बना सकती है, ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के बैतूल में सामने आया है। यहां लाकडाउन के चलते बेरोजगारी से जूझ रहे युवक ने पेट की आग से हारकर चोरी का रास्ता चुन लिया| लेकिन उसकी यह पहली चोरी भी उसके नौसिखिए पन के कारण पकड़ी गई और अब वह पुलिस की गिरफ्त में है।

पकड़े गए युवक पिंटू ने मांझी नगर में एक मकान का ताला तोड़कर गैस चूल्हा सिलेंडर, टीवी और खाने का अनाज चोरी लिया ।जिसकी मकान मालिक ने बैतूल गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद 24 घण्टे के अंदर पुलिस ने चोर को सामान के साथ गिरफ्तार कर लिया| पकड़े गए आरोपी पिंटू नागले के।मुताबिक लॉकडाऊन के चलते उसे कंही काम नही मिला और वह दो वक्त के खाने को मजबूर हो गया था।  उसे राशन दुकान से अनाज तो मिल गया लेकिन खाना बनाने के लिए जरूरी सामान कहाँ से लाता । बस यही सोचकर उसने अपनी जिंदगी की पहली चोरी कर यह कलंक अपने माथे पर लगा लिया। गंज पुलिस ने बताया कि  माझी नगर में रहने वाले अरविंद अमरुते अपने मकान में ताला लगाकर किसी काम से बाहर गए थे इसी बीच उनके घर मे चोरी हो गई जिसमें चोर ने खाना बनाने का सामान  टीवी, गैस सिलेंडर पानी की मोटर  चोरी कर ले गया  था शिकायत के बाद 24 घण्टे में पुलिस ने चोर को सामान  सहित गिरफ्तार कर लिया है ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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