जब्त डंपरों से चुराते थे बैटरी, चोरी के बाद लगा दी थी डंपर में आग, चार गिरफ्तार

जब्त डंपरों से चुराते थे बैटरी, चोरी के बाद लगा दी थी डंपर में आग, चार गिरफ्तार

बैतूल| वाजिद खान| बैतूल (Betul) की शाहपुर पुलिस ने लाखों रुपये की चोरी और रेत डंपरों (Sand Dumper) में आग लगाने वाले चोर गैंग को गिरफ्तार किया है । ये गैंग उन रेत डंपरों को निशाना बनाता था जिन्हें पुलिस और प्रशासन ने जप्त कर थाने और कार्यालयों में खड़ा कराया है।

पिछले 13 जून को शाहपुर तहसील कार्यालय में खड़े रेत डम्फर को आग के हवाले कर यह गैंग उसमे रखे पार्ट्स,स्टेफनी और बैटरी चुरा ले गया था। चोरों ने ऐसे ही कई ट्रकों को निशाना बनाकर उनकी बैटरियां चुरा ली थी। चोरी के बाद ये बैटरी बेचने की जुगत में थे। जिसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने मुखबिरों की मदद से जाल बिछाया और गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लाखो रुपये की बैटरियां, स्टेफनी ,टायर बरामद किए है।

पकड़े गए आरोपियों में गोलू उर्फ अजय सिंह/पिता विजय ठाकुर निवासी स्टाफ क्वार्टर, राज कुमार पिता रामसिंह इवने निवासी पाठई , सैयद इमरान उर्फ छोटू पिता सैयद करीम और विनोद पिता श्यामचरण दुबे निवासी शाहपुर का नाम शामिल है। चोरो ने  बरेठा घाट, पेट्रोल पंप के सामने से खड़े ट्रक टैक्टर , तहसील परिसर के पास जप्त खड़े डम्फरो से 15 नग बैटरी, 4 स्टेपनी, जैक ,  संजय निकुंज नर्सरी, माचना नदी, आमढाना नदी, एंव छुरी से चार समर्सिवल मोटर पंप चोरी करना बताया साथ ही भोपाल से एक हौंडा कम्पनी का मोटरसाइकिल चुराना भी स्वीकार किया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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